पेन नहीं पकड़ सकता, फिर भी 100% नंबर! उदयपुर के इस बेटे ने कर दिखाया कमाल!
उदयपुर के दिव्यांग छात्र लक्षित परमार ने RBSE 10वीं परीक्षा में 100% अंक हासिल कर मिसाल पेश की। सेरेब्रल पाल्सी से जूझते हुए भी वे पेन नहीं पकड़ सकते, लेकिन अपनी तेज याददाश्त और मेहनत के दम पर यह उपलब्धि हासिल की। राइटर की मदद से परीक्षा देकर लक्षित ने साबित किया कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। अब उनका सपना कलेक्टर बनकर समाज में बदलाव लाने का है।
उदयपुर 19 अप्रैल 2026 :- राजस्थान के उदयपुर से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी शारीरिक बाधा बड़ी नहीं होती। 18 वर्षीय लक्षित परमार ने RBSE की 10वीं बोर्ड परीक्षा में दिव्यांग श्रेणी के तहत 100 प्रतिशत अंक हासिल कर इतिहास रच दिया है।
लक्षित बचपन से ही सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। इस बीमारी के कारण वे अपने हाथ-पैर ठीक से हिला भी नहीं पाते और पेन पकड़ना तक उनके लिए संभव नहीं है। इसके बावजूद उनकी याददाश्त इतनी तेज है कि एक बार पढ़ी हुई चीज उन्हें पूरी तरह याद रह जाती है।
10 साल तक पिता ने गोद में उठाकर पहुंचाया स्कूल
लक्षित के पिता दिनेश कुमार, जो एक छोटे व्यापारी हैं, अपने बेटे की पढ़ाई के लिए हर दिन उसे गोद में उठाकर स्कूल लेकर जाते रहे। परिवार ने कभी लक्षित को यह महसूस नहीं होने दिया कि वह किसी तरह से कमजोर हैं।
दिनेश कुमार बताते हैं कि आज उनके बेटे की सफलता पर उन्हें गर्व है और जो लोग कभी उसकी क्षमता पर सवाल उठाते थे, वही अब बधाई दे रहे हैं।
स्कूल और टीचर्स का अहम योगदान
कई स्कूलों ने लक्षित की स्थिति को देखते हुए एडमिशन देने से मना कर दिया था, लेकिन हैप्पी होम स्कूल ने उन्हें मौका दिया और हर संभव सहयोग किया।
9वीं तक लक्षित खुद परीक्षा लिखते थे, लेकिन परेशानी को देखते हुए 10वीं में उन्हें ‘राइटर’ की सुविधा दी गई। उन्होंने अपने जवाब बोलकर बताए और राइटर ने उन्हें लिखा। इसके लिए लक्षित ने खास ट्रेनिंग भी ली थी।
किताबों से दोस्ती, दिमाग बना ताकत
लक्षित का ज्यादातर समय लेटे-लेटे पढ़ाई और किताबें पढ़ने में गुजरता है। उन्हें Atomic Habits और Deep Work जैसी किताबें पढ़ना पसंद है।
उनके स्कूल के डायरेक्टर के अनुसार, लक्षित के सवाल इतने अनोखे होते हैं कि सामान्य छात्र भी वहां तक सोच नहीं पाते।
अब कलेक्टर बनना है सपना
लक्षित का सपना है कि वह सिविल सर्विसेज की तैयारी कर कलेक्टर बने और समाज में बदलाव लाए। उनका मानना है कि इंसान को अपनी कमजोरियों पर नहीं, बल्कि अपनी ताकत पर ध्यान देना चाहिए।
क्या है सेरेब्रल पाल्सी?
सेरेब्रल पाल्सी एक ऐसी स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क के उस हिस्से को नुकसान पहुंचता है जो मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:
मांसपेशियों में कड़ापन या ढीलापन
चलने और संतुलन बनाने में परेशानी
हाथ-पैरों का असामान्य मूवमेंट
बोलने और निगलने में दिक्कत
यह समस्या आमतौर पर जन्म के समय या बचपन में ही विकसित हो जाती है।
प्रेरणा बन गया लक्षित का संघर्ष
लक्षित परमार की कहानी सिर्फ एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो किसी न किसी कठिनाई से जूझ रहे हैं। यह उपलब्धि बताती है कि अगर हौसले मजबूत हों, तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, सफलता जरूर मिलती है।