मां का दिल टूटा, आंख भी बंद हुई… फिर भी नहीं रुकी—रोहिणी गुर्जर ने दर्द को हराकर पाई RAS सफलता!
अजमेर की रोहिणी गुर्जर ने बेहद कठिन परिस्थितियों में RAS 2023 परीक्षा पास कर प्रेरणादायक मिसाल पेश की। तैयारी के दौरान उन्होंने पति, दादी और 10 साल की बेटी को खो दिया। मेन्स परीक्षा से दो दिन पहले सड़क हादसे में उनकी एक आंख भी बंद हो गई, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और एक आंख से परीक्षा देकर सफलता हासिल की। आज वे कॉपरेटिव सर्विस में कार्यरत हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।
राजस्थान में घोषित हुए हालिया परीक्षा परिणामों के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो सिर्फ सफलता नहीं बल्कि अदम्य साहस, धैर्य और जज्बे की मिसाल बन गई है। यह कहानी है अजमेर जिले के नारेली गांव की रहने वाली रोहिणी गुर्जर की, जिन्होंने जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों से लड़ते हुए राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) 2023 में सफलता हासिल की।
सपनों की शुरुआत और संघर्ष का लंबा सफर
रोहिणी का सपना बचपन से ही प्रशासनिक सेवा में जाने का था। वर्ष 2006 में स्नातक करने के बाद उन्होंने RAS की तैयारी शुरू की। लेकिन उनकी यह यात्रा आसान नहीं रही। तैयारी के दौरान ही उनके पति का निधन हो गया। इस गहरे सदमे के बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ती रहीं।
एक के बाद एक टूटते सहारे, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी
जीवन ने उनकी परीक्षा यहीं खत्म नहीं की। प्री-एग्जाम की तैयारी के दौरान उनकी दादी का निधन हो गया, जो उनके लिए सबसे बड़ा सहारा थीं। इसके बावजूद रोहिणी ने प्री परीक्षा पास कर ली। लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी थी।
मुख्य परीक्षा से महज 8 दिन पहले उनकी 10 साल की बेटी का निधन हो गया। एक मां के लिए यह असहनीय दुख होता है, लेकिन रोहिणी ने इस दर्द को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने खुद को संभालते हुए परीक्षा देने का फैसला किया।
एक आंख से दी परीक्षा, दर्द के बीच दिखाई हिम्मत
परीक्षा से ठीक दो दिन पहले जयपुर में एक सड़क हादसे में उनकी आंख में गंभीर चोट लग गई, जिससे एक आंख पूरी तरह बंद हो गई। डॉक्टरों ने आराम की सलाह दी, लेकिन रोहिणी का लक्ष्य अडिग था। उन्होंने एक आंख से, शारीरिक दर्द और मानसिक तनाव के बावजूद, RAS मेन्स परीक्षा दी।
सफलता ने बदली जिंदगी, बनीं प्रेरणा
रोहिणी की मेहनत और हौसले का परिणाम यह रहा कि उन्होंने RAS 2023 में सफलता हासिल की। वर्तमान में वे कॉपरेटिव सर्विस में कार्यरत हैं। उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए एक मजबूत संदेश है, जो छोटी-छोटी असफलताओं से निराश हो जाते हैं।
युवाओं के लिए संदेश
रोहिणी गुर्जर की कहानी बताती है कि परीक्षा के अंक या असफलता जीवन का अंत नहीं होते। असली परीक्षा तो जीवन की चुनौतियों से लड़ना है। उन्होंने साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा सफलता की राह नहीं रोक सकती।