"CEC जेल जाएंगे..." रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की दहाड़, जानें राहुल ने मंच से क्यों दी इतनी बड़ी चेतावनी?
1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक ने लोकतंत्र और संविधान बचाने के नाम पर विशाल रैली की। राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी नेताओं ने 'वोट चोरी' का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। पढ़ें रैली और सुप्रीम कोर्ट मामले की पूरी कवरेज।
लोकतंत्र, संविधान की रक्षा और कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन के नेताओं ने एक विशाल रैली का आयोजन किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आह्वान पर आयोजित इस 'रामलीला मार्च' में समाजवादी पार्टी, टीएमसी, आरजेडी, वाम दल और कई अन्य संगठनों ने हिस्सा लिया। सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चली इस रैली में विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (EC) पर तीखे प्रहार किए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह का आरोप लगाते हुए उन्हें जेल भेजने की चेतावनी दी। इससे एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'जनमहाभियोग' भी पारित किया था।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही है कानूनी लड़ाई
यह विरोध प्रदर्शन सड़क के साथ-साथ अदालत में भी लड़ा जा रहा है। इससे पहले 12 अक्टूबर 2026 को 12 विपक्षी पार्टियों के 13 नेताओं ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला था और शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी।
15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर इस याचिका को SIR से जुड़ी अन्य लंबित याचिकाओं के साथ क्लब कर दिया था। बाद में 27 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष चुनाव आयोग ने दलील दी कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया है और अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 तय की है।
रैली में दिग्गजों का जमावड़ा और उनके तीखे बयान
राहुल गांधी समेत तमाम प्रमुख नेता 24 अकबर रोड से ओपन-रूफ गाड़ियों में सवार होकर मिंटो ब्रिज होते हुए रामलीला मैदान पहुंचे। राहुल के साथ गाड़ी में अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला, प्रियंका गांधी, सुप्रिया सुले और अभिषेक बनर्जी मौजूद थे। मंच से संबोधित करते हुए नेताओं ने बड़े आरोप लगाए:
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राहुल गांधी: उन्होंने दावा किया कि 2024 के चुनाव के बाद वोटर लिस्ट से करीब 13.5 करोड़ (लगभग 15%) असली वोटरों के नाम काट दिए गए, जिससे यह चुनाव अवैध हो गया है। राहुल ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार ने देश की आवाज को कुचला है और इसके लिए उन्हें जेल जाना होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कनॉट प्लेस पहुंचने पर पुलिस और प्रशासन ने जबरन दुकानें बंद करवा दीं।
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मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव: खड़गे ने इसे युवाओं और महिलाओं का वोट छीनने की साजिश बताया। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में एक करोड़ हिंदुओं के नाम काटे गए और 2027 के चुनाव में यूपी से भाजपा की विदाई तय है।
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ममता बनर्जी और फारूक अब्दुल्ला: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ वोट नहीं, पूरी काउंटिंग लूटी गई है ("ज्ञानेश कुमार, यस पापा")। नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि मुसलमानों पर उंगली उठाने वाली भाजपा को समझना चाहिए कि देश के लिए सभी ने खून बहाया है और 1.27 करोड़ हिंदुओं के नाम काटना साजिश का हिस्सा है।
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अन्य नेता: डीके शिवकुमार, शशि थरूर, पवन खेड़ा, एमए बेबी और महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं ने भी इसे देश का दूसरा स्वतंत्रता संग्राम बताते हुए एकजुट होकर लड़ने का आह्वान किया।
व्यापारियों का नुकसान और पुलिस की चाक-चौबंद सुरक्षा
इस बड़े राजनीतिक आयोजन का असर दिल्ली के व्यापार पर भी पड़ा। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अध्यक्ष बृजेश गोयल और व्यापारी संगठन CAIT ने त्योहारी सीजन (दिवाली, छठ) का हवाला देते हुए रैली को 10 नवंबर तक टालने की अपील की थी। व्यापारियों को आशंका थी कि चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली सहित 20 बड़े बाजारों में 2.5 लाख दुकानें बंद रहने और रास्ते ब्लॉक होने से करीब 10 से 12 हजार करोड़ रुपए के कारोबार का नुकसान होगा। हालांकि, एक स्वतंत्र मंच के प्रतिनिधि दिपके ने वोट चोरी के खिलाफ चल रहे इस आंदोलन को अपना समर्थन भी दिया। सुरक्षा के लिहाज से रामलीला मैदान और आसपास सेंट्रल दिल्ली के DCP रोहित राजबीर के नेतृत्व में 200 से ज्यादा CCTV कैमरे लगाए गए थे। पुलिस, सेवा दल, सिविल डिफेंस और RWA के वॉलंटियर्स ने भीड़ और ट्रैफिक को नियंत्रित करने की कमान संभाली।
बीजेपी का पलटवार: 'आंकड़े गलत, कुर्सियां खाली'
विपक्ष के इन गंभीर आरोपों पर भाजपा ने कड़ा पलटवार किया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार 2024 में मुख्य चुनाव आयुक्त थे ही नहीं, वे 2025 में इस पद पर आए। पात्रा ने तंज कसते हुए कहा कि यदि 2024 का चुनाव अवैध था, तो राहुल गांधी का नेता प्रतिपक्ष (LoP) का पद भी अवैध है। इसके अलावा, पात्रा ने 10 लाख लोगों के जुटने के दावे को झूठा बताते हुए वीडियो और तस्वीरें साझा कीं, जिनमें 28 हजार क्षमता वाले रामलीला मैदान में हजारों कुर्सियां खाली दिखाई दे रही थीं।