भाइयों से लड़ते-लड़ते बन गई नेशनल चैंपियन! 10वीं की इस छात्रा ने कुश्ती में जीता गोल्ड, अब ओलंपिक पर है नजर
हिसार के राजथल गांव की बेटी खुशी ने 19वीं नेशनल ग्रेपलिंग रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल कर एशियन चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया है. महज 10वीं कक्षा की छात्रा खुशी का अगला लक्ष्य ओलंपिक गोल्ड है. पढ़ें संयम जैन की खास रिपोर्ट.
हरियाणा के हिसार जिले के नारनौंद खंड स्थित राजथल गांव की बेटी खुशी ने कुश्ती के अखाड़े में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. बचपन में फिल्म 'दंगल' देखकर पहलवान बनने का सपना संजोने वाली खुशी ने 19वीं नेशनल ग्रेपलिंग रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है. इस शानदार जीत के साथ ही उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है.
अंडर-17 में हिमाचल की खिलाड़ी को दी मात
यह राष्ट्रीय प्रतियोगिता 24 से 26 अक्टूबर के बीच उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित की गई थी. अंडर-17 आयु वर्ग के 52 किलोग्राम भार वर्ग में खेलते हुए खुशी ने अपने शानदार दांव-पेंच दिखाए. फाइनल मुकाबले में उन्होंने हिमाचल प्रदेश की प्रतिद्वंद्वी को धूल चटाते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया. इस स्वर्णिम सफलता के बाद खुशी अब नेपाल में होने वाली एशियाई चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी. इसके बाद उनका चयन कजाकिस्तान में आयोजित होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए भी हुआ है.
'दंगल' फिल्म ने बदल दी जिंदगी
वर्तमान में 10वीं कक्षा की छात्रा खुशी पिछले छह सालों से दिल्ली के कश्मीरी गेट स्थित चंद्रा अखाड़े में कुश्ती की बारीकियां सीख रही हैं. खुशी बताती हैं कि चौथी कक्षा में वह अपने भाइयों के साथ घर पर ही कुश्ती लड़ती थीं. लगभग 12-13 साल की उम्र में उन्होंने आमिर खान की फिल्म 'दंगल' देखी. इस फिल्म में गीता फोगाट के किरदार ने उन पर गहरी छाप छोड़ी और उन्होंने पेशेवर पहलवान बनने की ठान ली. पिता सुनील कुमार (पेशे से ठेकेदार) और माता पूनम (गृहिणी) ने बेटी के इस सपने को पूरा करने के लिए उसे दिल्ली के हॉस्टल भेज दिया.
पैतृक गांव लौटने पर हुआ भव्य स्वागत, ओलंपिक का है लक्ष्य
गोल्ड मेडल जीतकर जब खुशी अपने गांव राजथल पहुंचीं, तो ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया. उन्हें फूलों और नोटों की मालाएं पहनाकर सम्मानित किया गया. खुशी के पिता सुनील कुमार ने गांव वालों से मिले इस प्यार और सम्मान पर आभार व्यक्त किया. बड़ी बहन मुस्कान ने खुशी की खेल प्रतिभा की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि वह एक दिन ओलंपिक में भी देश के लिए पदक लाएगी. खुद खुशी का अंतिम लक्ष्य ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा लहराना है.
इस सम्मान समारोह में मेहर सिंह बिसला, सतरोल खाप के पूर्व उपप्रधान रामकुमार शर्मा, सरपंच प्रतिनिधि अनिल गोदारा, रतन शर्मा, सतबीर सिंह, मनोज कुमार, तकदीर, बिट्टू, सुरेश, वीरेंद्र, जय सिंह, प्रेम और शमशेर सहित भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.
नशा मुक्त समाज और खेलों को बढ़ावा देने का संदेश
इस जश्न के दौरान गांव में पिछले दो महीने से चल रहे नशा विरोधी अभियान की भी चर्चा हुई. खुशी और उनके पिता ने युवाओं को संदेश दिया कि वे नशे से दूर रहें और खेलों की दुनिया में अपना करियर बनाकर देश का नाम रोशन करें. ग्रामीणों ने भी इस बात पर जोर दिया कि आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ और सकारात्मक माहौल देना पूरे समाज की जिम्मेदारी है.