182 करोड़ डकार गए ठेकेदार? 34 हजार में से सिर्फ 4 हजार ढाणियों को मिली बिजली
बाड़मेर जिले की सीमावर्ती ढाणियों में 182 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के बावजूद 34 हजार से ज्यादा ढाणियां अंधेरे में हैं। रामसर के नील्सर, राठौड़ का तला और कुंतल का पार में ठेकेदारों की लापरवाही और अवैध वसूली के आरोप सामने आए हैं.
रोशनी के महापर्व दिवाली पर जहां पूरा देश जगमगा रहा है, वहीं बाड़मेर जिले के सीमावर्ती इलाकों में आज भी सैकड़ों ढाणियां ऐसी हैं जिनके नसीब में सिर्फ घुप अंधेरा है। हर घर बिजली जैसे बड़े दावों की जमीनी हकीकत इन रेतीले धोरों में दम तोड़ती नजर आ रही है। राठौड़ का तला, कुंतल का पार और नील्सर सहित कई ऐसे सरहदी गांव हैं, जहां सालों पहले सरकारी दफ्तरों में फाइलें जमा कराने और डिमांड राशि भरने के बावजूद शाम ढलते ही सन्नाटा और अंधेरा छा जाता है।
182 करोड़ का आरडीएसएस प्रोजेक्ट, लेकिन काम की रफ्तार धीमी
डिस्कॉम की आरडीएसएस योजना के एईएन नवल किशोर मीणा ने बताया कि बाड़मेर में 34 हजार ढाणियां बिजली से वंचित हैं। इनमें अब तक 4 हजार कनेक्शन हुए हैं। 182 करोड़ रुपये का यह प्रोजेक्ट है। सबसे पहले जनजातीय क्षेत्र के गांवों में कनेक्शन किए जा रहे हैं। इसके लिए 15 महीने का समय तय किया गया था, जिसमें से अब 6 से 7 महीने का समय बचा है। विभाग का दावा है कि जल्द ही सभी को कनेक्शन दे दिए जाएंगे।
नील्सर: 2017 से रोशनी का इंतजार, अंधेरा कायम
रामसर तहसील क्षेत्र के अभे का पार (नील्सर) में ग्रामीणों का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। यहां के लोगों ने साल 2017 में बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। हाल ही में कुछ चुनिंदा ढाणियों को बिजली से जोड़ दिया गया, लेकिन अभी भी 5 से 7 ढाणियां पूरी तरह वंचित हैं। दीनदयाल उपाध्याय योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं भी इन ढाणियों तक रोशनी नहीं पहुंचा सकीं। मजबूरन, ग्रामीण रात के अंधेरे को दूर करने के लिए सोलर प्लेटों के सहारे जिंदगी गुजार रहे हैं।
राठौड़ का तला: रसीदें कटवाकर भी ठगे गए ग्रामीण
जुगवा गांव की करीब 35-40 ढाणियां आज भी बिजली के लिए तरस रही हैं। ग्रामीण बाकाराम का दर्द बयां करता है कि भिलों की बस्ती लंबे समय से कनेक्शन की गुहार लगा रही है। ग्रामीणों ने बाकायदा 200-200 रुपए की रसीदें कटवाकर फाइलें जमा करवा दी थीं। लेकिन पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले ठेकेदार अपनी सहूलियत के हिसाब से कुछ ढाणियों को तो जोड़ गए, बाकी को अंधेरे में छोड़ दिया।
कुंतल का पार: लकड़ी के खंभों पर झूल रही हैं मौत की तारें
मिठड़ा वीरमियां में करीब 50 घरों की आबादी है। लंबे समय से यहां हालात इतने बदतर हैं कि लोग जुगाड़ के सहारे जी रहे हैं। बिजली के पोल नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने खुद ही लकड़ी के पोल लगाकर उन पर बिजली की झूलती तारें खींच रखी हैं, जो किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे सकती हैं।
ठेकेदारों की तानाशाही और अवैध वसूली का खेल
बॉर्डर इलाके की इन ढाणियों को रोशन करने के लिए सरकार ने टेंडर तो जारी कर दिए हैं, लेकिन धरातल पर पेटी-कॉन्ट्रैक्टर्स की मनमानी हावी है। ठेकेदार अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कनेक्शन के नाम पर कई जगह भोले-भाले किसानों से अवैध वसूली की जा रही है।