धनबल और स्टार प्रचारकों के सामने अकेले डटे 26 साल के जगमाल सिंह, मामूली अंतर से हार कर भी जीता दिल

बाड़मेर के जूना पतरासर ग्राम पंचायत चुनाव में 26 वर्षीय युवा जगमाल सिंह ने बिना किसी धनबल और स्टार प्रचारकों के, रसूखदार परिवार समर्थित उम्मीदवार को कड़ी टक्कर दी। हार कर भी जगमाल ने पूरे इलाके का दिल जीत लिया है।

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yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026 Sub Editor
November 2, 2026 • 9:22 PM  263
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धनबल और स्टार प्रचारकों के सामने अकेले डटे 26 साल के जगमाल सिंह, मामूली अंतर से हार कर भी जीता दिल
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धनबल और स्टार प्रचारकों के सामने अकेले डटे 26 साल के जगमाल सिंह, मामूली अंतर से हार कर भी जीता दिल

 बाड़मेर जिले की जूना पतरासर ग्राम पंचायत का सरपंच चुनाव इस बार पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में संपन्न हुए पंचायतीराज चुनावों में यह सीट बाड़मेर की सबसे बड़ी 'हॉट सीट' साबित हुई। यहाँ का मुकाबला एक ऐतिहासिक और दिलचस्प जंग में तब्दील हो गया, जहाँ एक तरफ भारी-भरकम राजनैतिक रसूख था, तो दूसरी तरफ एक 26 साल के युवा का हौसला।

धनबल और रसूखदार परिवार बनाम आम युवा

इस चुनाव में एक ओर जाने-माने भामाशाह स्व. तन सिंह चौहान का प्रतिष्ठित परिवार था। प्रत्याशी हिंदू सिंह जी के समर्थन में स्व. तन सिंह जी के दोनों सुपुत्रों ने दिन-रात एक कर दिया। राजस्थान की कई बड़ी हस्तियों को स्टार प्रचारक के रूप में उतारा गया और भारी धनबल का प्रयोग कर पूरे वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश की गई।

इसके ठीक विपरीत, 26 वर्षीय युवा जगमाल सिंह एक सामान्य परिवार से आते हैं। उनके पास न तो कोई स्टार प्रचारक था, न ही धनबल और न ही किसी बड़ी हस्ती का सहारा। इसके बावजूद, जगमाल सिंह अकेले दम पर इस चुनावी मैदान में डटे रहे।

स्वाभिमान और गरीबों की आवाज बने जगमाल

जगमाल सिंह ने गांव की इज्जत, स्वाभिमान और गरीब व वंचित परिवारों की आवाज बनकर आवाम के बीच अपना विजन रखा। उन्होंने बड़े अहंकार और रसूख को ललकारते हुए खुद अकेले घर-घर जाकर प्रचार किया। उनकी इसी सादगी, ईमानदारी और बेखौफ अंदाज ने आम जनता और विशेषकर युवाओं का दिल जीत लिया।

रोमांचक मुकाबले में चंद वोटों से चूके, पर जीती लोगों की सहानुभूति

बिना किसी संसाधन के लड़े गए इस चुनाव में जगमाल सिंह ने विपक्ष को ऐसी कड़ी टक्कर दी कि अंत तक मुकाबला बेहद रोमांचक बना रहा। तमाम बड़ी हस्तियों के प्रचार के बावजूद, जगमाल सिंह यह चुनाव महज कुछ वोटों (लगभग 30 से 57 वोट) के बेहद मामूली अंतर से ही पीछे रहे।

युवाओं के लिए मिसाल बनी यह 'नैतिक जीत'

हार और जीत लोकतंत्र रूपी सिक्के के दो पहलू हैं, लेकिन जगमाल सिंह ने जिस बहादुरी से यह जंग लड़ी है, उसकी पूरे बाड़मेर में जमकर तारीफ हो रही है। पूरा क्षेत्र उनके जज्बे को सलाम कर रहा है। इस चुनाव ने यह साबित कर दिया है कि आज के समय में समाज को ऐसे ही निडर युवाओं की जरूरत है, जो वंचितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो सकें। पूरे इलाके में यह चर्चा जोरों पर है कि यह चुनाव आने वाले समय में राजनीति में बड़े बदलाव और युवाओं की मजबूत भागीदारी का स्पष्ट संकेत है।

yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026 Sub Editor

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