जैसलमेर के कोढ़ा गांव में सोलर कंपनी पर खेजड़ी पेड़ काटने का आरोप, ग्रामीणों ने कंपनी गेट पर लगाया धरना; पुलिस का दावा- केवल 2 पौधे कटे

जैसलमेर के कोढ़ा गांव में सौर ऊर्जा कंपनी 'सेरेंटिका रिन्यूएबल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' पर सैकड़ों साल पुराने खेजड़ी पेड़ काटने का आरोप लगा है। ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने कंपनी गेट पर धरना दिया, मुकदमा, जुर्माना और सख्त कानून की मांग की। पुलिस का दावा है कि केवल 2 छोटे पौधे 4 महीने पहले कटे, जबकि ग्रामीण बड़े पेड़ों के कटने का आरोप लगा रहे हैं। खेजड़ी को थार की जीवन रेखा मानते हुए यह मामला विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच विवाद को उजागर कर रहा है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
February 11, 2026 • 12:03 PM  115
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राजस्थान
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जैसलमेर के कोढ़ा गांव में सोलर कंपनी पर खेजड़ी पेड़ काटने का आरोप, ग्रामीणों ने कंपनी गेट पर लगाया धरना; पुलिस का दावा- केवल 2 पौधे कटे
“जैसलमेर के कोढ़ा गांव में सोलर कंपनी पर खेजड़ी पेड़ काटने का आरोप, ग्रामीणों ने कंपनी गेट पर लगाया धरना; पुलिस का दावा- केवल 2 पौधे कटे”
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11 Feb 2026
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जैसलमेर के कोढ़ा गांव में सोलर कंपनी पर खेजड़ी पेड़ काटने का आरोप, ग्रामीणों ने कंपनी गेट पर लगाया धरना; पुलिस का दावा- केवल 2 पौधे कटे

जैसलमेर जिले के फतेहगढ़ उपखंड अंतर्गत कोढ़ा गांव में एक निजी सौर ऊर्जा कंपनी 'सेरेंटिका रिन्यूएबल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' (Serentica Renewables India Private Limited) पर गंभीर आरोप लगे हैं। कंपनी पर आरोप है कि उसने थार रेगिस्तान की जीवन रेखा माने जाने वाले खेजड़ी के कई पेड़ों को अवैध रूप से काट दिया है। यह घटना राजस्थान में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के बीच पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच चल रही बहस को और तेज कर रही है।

घटना का विवरण

मंगलवार रात करीब 11 बजे के आसपास ग्रामीणों को सूचना मिली कि कंपनी के सोलर प्रोजेक्ट स्थल पर खेजड़ी के पेड़ काटे जा रहे हैं। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण, पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। उन्होंने कंपनी के मुख्य गेट के सामने धरना शुरू कर दिया और नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि कटे हुए पेड़ सैकड़ों साल पुराने थे और यह काम पूरी तरह बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के रात के अंधेरे में किया गया।ग्रामीणों ने पेड़ों की गिनती करने की कोशिश की और कंपनी के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की। धरने में शामिल पर्यावरण प्रेमी भाखरराम विश्नोई ने कहा कि कटे पेड़ काफी पुराने दिख रहे हैं। यह सिर्फ पेड़ कटने का मामला नहीं, बल्कि पूरे पर्यावरण और रेगिस्तानी इको-सिस्टम से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

धरने पर बैठे ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने तीन मुख्य मांगें रखी हैं:सख्त कानून बनाया जाए - खेजड़ी जैसे संरक्षित राज्य वृक्ष की कटाई पर भविष्य में पूरी तरह रोक लगाने के लिए ठोस और सख्त कानून लागू किया जाए।भारी आर्थिक जुर्माना - जिन कंपनियों या व्यक्तियों ने खेजड़ी काटी है, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाए ताकि यह एक मिसाल बने और दोबारा ऐसी घटनाएं न हों।मुकदमा और कड़ी सजा - दोषियों के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाए और कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।मनोज विश्नोई जैसे प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक इन मांगों पर अमल नहीं होता और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक धरना जारी रहेगा।

पुलिस का पक्ष और विरोधाभास

झिनझिनयाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन लोग अपनी मांगों पर अड़े रहे। थाना प्रभारी सुमेर सिंह ने कहा कि जांच में केवल 2 खेजड़ी के छोटे पौधे (न कि बड़े पेड़) कटे पाए गए हैं, और वे भी 4 महीने पहले कटे थे। पुलिस का दावा है कि यह कोई बड़ी घटना नहीं है, जबकि ग्रामीण सैकड़ों साल पुराने बड़े पेड़ों के कटने का आरोप लगा रहे हैं। इस विरोधाभास ने मामले को और विवादास्पद बना दिया है।

खेजड़ी का महत्व: रेगिस्तान की जीवन रेखा

खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है और थार रेगिस्तान में इसे 'जीवन वृक्ष' माना जाता है। यह पेड़:मिट्टी को उपजाऊ बनाता है और रेत के टीलों को स्थिर रखता है।भीषण गर्मी और सूखे में भी हरा-भरा रहता है, इंसानों और पशुओं को छाया देता है।इसकी फलियां 'सांगरी' राजस्थान की प्रसिद्ध सब्जी हैं, जो किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।बिश्नोई समाज इसे पवित्र मानता है और दशहरे पर शमी वृक्ष के रूप में पूजा करता है।आयुर्वेद में इसका उपयोग गठिया, जोड़ों के दर्द, गैस और अन्य समस्याओं के इलाज में किया जाता है।पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि सौर परियोजनाओं के नाम पर खेजड़ी की कटाई से रेगिस्तानी इको-सिस्टम बिगड़ रहा है, तापमान बढ़ रहा है और वर्षा प्रभावित हो रही है।

व्यापक संदर्भ: सौर ऊर्जा vs पर्यावरण

यह घटना राजस्थान में सोलर प्लांट्स के विस्तार के बीच हो रही कई इसी तरह की घटनाओं का हिस्सा है। राज्य के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर आदि जिलों में सौर परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान लाखों खेजड़ी पेड़ कटने की रिपोर्ट्स आई हैं। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को इसकी जानकारी थी? विकास के नाम पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना कितना उचित है?

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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