बारां जिले के नाहरगढ़ में वन विभाग के कर्मचारियों से मारपीट और राजकार्य में बाधा डालने के आरोप में पुलिस भगत सिंह सेना के प्रमुख नरेश मीणा की सरगर्मी से तलाश कर रही है। मंगलवार (3 नवंबर) की सुबह भारी पुलिस बल ने नया गांव (बारां) स्थित उनके घर पर दबिश दी। घर और आसपास के इलाकों में सघन सर्च अभियान चलाया गया।
घर पर पुलिस की रेड और परिजनों का विरोध
अचानक घर पर हुई पुलिस की इस कार्रवाई से नरेश मीणा के पिता कल्याण सिंह मीणा और अन्य परिजनों ने कड़ी आपत्ति जताई। परिजनों का कहना था कि घर में महिलाएं और बुजुर्ग रहते हैं, ऐसे में बिना पूर्व सूचना के पुलिस के अचानक घुसने से परिवार में दहशत का माहौल बन गया। इसके जवाब में पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मारपीट और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर अपराध होने पर पुलिस तुरंत कार्रवाई करती है। जब पुलिस ने नरेश मीणा को बुलाने के लिए कहा, तो परिजनों का जवाब था कि वे खुद पेश होने की बात कह चुके हैं।
एसपी को चैलेंज और 6 नवंबर को सरेंडर का ऐलान
पुलिस की रेड से कुछ घंटों पहले, सोमवार रात नरेश मीणा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर बारां एसपी को खुली चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि वे कोई भगोड़े नहीं हैं और दिनभर से अपने गांव में ही मौजूद हैं, पुलिस चाहे तो उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। इसके बाद मंगलवार सुबह उन्होंने एक नई पोस्ट में 6 नवंबर को अपनी गिरफ्तारी देने की घोषणा की, हालांकि पुलिस के पहुंचने से पहले ही वे घर से गायब हो गए।
वीडियो में नरेश मीणा ने पंचायत चुनाव के तीसरे चरण का भी जिक्र किया और समर्थकों से 'हाथी' चुनाव चिह्न पर वोट देने की अपील की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वे गिरफ्तार होते हैं, तो उनके बेटे अनिरुद्ध के साथ कमल राठौड़, स्नेहा धाकड़ और जैन जी चुनाव अभियान की कमान संभालेंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद 1 नवंबर को शुरू हुआ, जब नरेश मीणा पंचायत चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों के समर्थन में नाहरगढ़ पहुंचे थे। वहां किसानों ने शिकायत की कि वन विभाग के कर्मचारियों ने उनकी पानी की मोटरें और पाइप जब्त कर लिए हैं। इस पर नरेश मीणा ने चेतावनी दी कि अगर किसानों पर अत्याचार हुआ तो वे सरकारी दफ्तरों में आग लगा देंगे। इसके बाद वे समर्थकों के साथ नाहरगढ़ रेंज ऑफिस पहुंचे, जहां जमकर हंगामा हुआ और वनकर्मियों के साथ मारपीट कर जब्त सामान जबरन छुड़ा लिया गया। वन विभाग के नाका प्रभारी प्रदीप सिंह राठौड़ की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
चार समर्थक गिरफ्तार, थाने पर प्रदर्शन
इस घटना के बाद पुलिस ने सोमवार को नरेश मीणा के चार समर्थकों—जितेंद्र नागर (36), देवेंद्र (22), पप्पू (25) और मुरारी (20)—को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके विरोध में सोमवार देर शाम भगत सिंह सेना के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने नाहरगढ़ थाने का घेराव कर नारेबाजी की।
प्रदर्शन में शामिल बसपा की प्रधान पद प्रत्याशी ममता नागर ने कहा कि नरेश मीणा हमेशा गरीबों और पीड़ितों के हक की लड़ाई लड़ते हैं, इसलिए प्रशासन उन्हें निशाना बना रहा है। समर्थकों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनके निर्दोष साथियों को रिहा नहीं किया जाता, वे जमानत नहीं करवाएंगे और खुद भी गिरफ्तारी देने को तैयार हैं।
एक महीने में तीन मामले दर्ज
नरेश मीणा पर पिछले एक महीने के भीतर यह तीसरा मुकदमा है। इससे पहले छबड़ा में खाद की कमी के मुद्दे पर एसडीएम ऑफिस के बाहर धरना देने और अधिकारियों को धमकाने के आरोप में उन पर 8 धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई थी। वहीं, करीब एक महीने पहले जयपुर कूच के दौरान शिवदासपुरा टोल पर जाम लगाने का भी मामला दर्ज है। बता दें कि नरेश मीणा पहली बार 13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान एक एसडीएम को थप्पड़ मारने की घटना के बाद चर्चा में आए थे।