7 दिन में चांदी 8600 रुपये, सोना 4200 रुपये महंगा, त्योहारी सीजन में और बढ़ने की संभावना

पिछले सात दिनों में चांदी की कीमत 8600 रुपये प्रति किलोग्राम और सोने की कीमत 4200 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़ी। त्योहारी मांग और वैश्विक कारकों के कारण कीमतों में और उछाल की संभावना

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Web Desk Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Sub Editor
September 24, 2025 • 4:38 PM  373
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7 दिन में चांदी 8600 रुपये, सोना 4200 रुपये महंगा, त्योहारी सीजन में और बढ़ने की संभावना

भारतीय बाजार में चांदी और सोने की कीमतों में पिछले सात दिनों में भारी उछाल देखने को मिला है। चांदी की कीमत में 8600 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है, जबकि स्टैंडर्ड सोने की कीमत में 4200 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी दर्ज की गई है। नवरात्रि और आगामी त्योहारी सीजन के बीच मांग में वृद्धि, कमजोर रुपये और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने इन कीमती धातुओं की कीमतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।

चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड वृद्धि

पिछले एक सप्ताह में चांदी की कीमतें 8,600 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़कर 1,39,000 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सितंबर 23, 2025 को सिल्वर फ्यूचर्स 0.12% की बढ़त के साथ 1,33,720 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग, विशेष रूप से सौर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में चांदी की बढ़ती खपत, ने इस तेजी को और बल दिया है। इसके अलावा, नवरात्रि और धनतेरस जैसे त्योहारों की वजह से स्थानीय मांग में भी इजाफा हुआ है।

उद्योग विशेषज्ञ का कहना है: “चांदी की कीमतों में इस तेजी का कारण न केवल त्योहारी मांग है, बल्कि वैश्विक बाजारों में इसकी औद्योगिक उपयोगिता भी है। सिल्वर की कीमतें जल्द ही 1,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को छू सकती हैं,” अक्षा कांबोज, उपाध्यक्ष, इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) ने कहा।

सोने की कीमतों में भी उछाल

सोने की कीमतों में भी पिछले सात दिनों में 4,200 रुपये प्रति 10 ग्राम की वृद्धि हुई है। मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,13,080 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,03,660 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई है। MCX पर अक्टूबर 2025 के लिए गोल्ड फ्यूचर्स 1,12,625 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहे थे, जिसमें 0.35% की बढ़त देखी गई। वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें 3,748.20 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच गई हैं।

वैश्विक अनिश्चितताएं, जैसे कि पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले अनिश्चितता, और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नरम मौद्रिक नीतियों ने सोने को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में और आकर्षक बना दिया है। इसके साथ ही, रुपये के मूल्य में कमजोरी ने भी आयातित सोने को और महंगा कर दिया है।

त्योहारी सीजन का प्रभाव

भारत में त्योहारी सीजन, विशेष रूप से नवरात्रि, धनतेरस और दिवाली, सोने और चांदी की मांग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सुमित शर्मा, रेडियन फिनसर्व के संस्थापक, कहते हैं, “सोना और चांदी न केवल निवेश के लिए, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के कारण भी खरीदे जाते हैं। इस साल त्योहारी मांग मजबूत रहने की उम्मीद है, जिससे कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।”

विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोने की कीमतें जल्द ही 1,20,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर सकती हैं, जबकि चांदी 1,50,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है। कोलिन शाह, कामा ज्वैलरी के प्रबंध निदेशक, ने कहा, “त्योहारी खरीदारी के दौरान ऊंची कीमतें मांग को प्रभावित नहीं करेंगी, क्योंकि सोना और चांदी भारतीय परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं।”

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर निवेशक सतर्कता बरतें। हालांकि, दीर्घकालिक निवेश के लिए सोना और चांदी अभी भी आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। जिगर त्रिवेदी, रिलायंस सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक, ने कहा, “चांदी की कीमतों में इस साल 52% की वृद्धि हुई है, जो सोने से बेहतर प्रदर्शन है। औद्योगिक मांग और निवेशकों की रुचि इसे और ऊपर ले जा सकती है।”

निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे कीमतों में अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए छोटे-छोटे निवेश करें। इसके अलावा, भौतिक सोने और चांदी के बजाय गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स) में निवेश भी एक सुरक्षित और सुविधाजनक विकल्प हो सकता है।

वैश्विक और स्थानीय कारक

  • वैश्विक अनिश्चितता: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी चुनाव से पहले अनिश्चितता ने सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत किया है।

  • कमजोर रुपया: रुपये के मूल्य में गिरावट ने आयातित धातुओं की कीमतों को और बढ़ा दिया है।

  • औद्योगिक मांग: सिल्वर की बढ़ती मांग, विशेष रूप से सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में, ने इसकी कीमतों को नई ऊंचाई दी है।

  • फेडरल रिजर्व की नीतियां: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नरम मौद्रिक नीतियों और ब्याज दरों में संभावित कटौती ने सोने और चांदी की कीमतों को समर्थन दिया है।

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