आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों पर अक्सर यह आरोप लगता रहा है कि वे अपने मॉडल को ट्रेन करने के लिए इंटरनेट से लेख, तस्वीरें और वीडियो बिना अनुमति के उठा लेती हैं। कॉपीराइट उल्लंघन के इन मामलों ने कई बड़े कानूनी विवादों को जन्म दिया है। लेकिन अब इस समस्या का एक पक्का तकनीकी समाधान सामने आया है।

इंटरनेट के तकनीकी नियम और मानक तय करने वाली वैश्विक संस्था IETF (Internet Engineering Task Force) के पास एक नया ड्राफ्ट प्रस्ताव पेश किया गया है। इसके जरिए अब वेबसाइट संचालक खुद यह तय कर सकेंगे कि उनका कंटेंट AI ट्रेनिंग के लिए उपलब्ध होगा या नहीं।

robots.txt फाइल के जरिए मिलेगी कंट्रोल की पावर

नई व्यवस्था के तहत वेबसाइट मालिकों को कोई बहुत बड़ा तकनीकी बदलाव नहीं करना होगा। वेबसाइट की मौजूदा robots.txt फाइल (जो यह तय करती है कि कौन से बॉट वेबसाइट को पढ़ सकते हैं) में सिर्फ कुछ लाइन का कोड जोड़ना होगा।

अब तक हर अलग-अलग AI कंपनी के लिए अलग-अलग नियम बनाने पड़ते थे। लेकिन इस नए सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि एक ही साझा कोड से सभी AI प्रोग्राम्स को निर्देश दिया जा सकेगा।

कंटेंट को अपनी मर्जी से कर सकेंगे कस्टमाइज

इस तकनीक में कस्टमाइजेशन का भी बेहतरीन विकल्प है:

  • पूरी पाबंदी: आप चाहें तो पूरी वेबसाइट के डेटा को AI ट्रेनिंग से बाहर रख सकते हैं।

  • आंशिक अनुमति: अगर किसी क्रिएटर की साइट पर वीडियो और प्रेस रिलीज दोनों हैं, तो वह सिर्फ प्रेस रिलीज को AI के लिए ओपन रख सकता है और वीडियो या प्रीमियम कंटेंट को ब्लॉक कर सकता है।

दिग्गज टेक कंपनियों का मिल रहा साथ

इस पहल को टेक इंडस्ट्री से भी सकारात्मक रिस्पॉन्स मिला है। Google, Microsoft और OpenAI जैसी बड़ी कंपनियों ने इस साझा व्यवस्था को अपनाने की पुष्टि की है। वहीं, Anthropic ने भी इस दिशा में अपना काम शुरू कर दिया है। इससे पब्लिशर्स और ब्लॉगर्स का काम काफी आसान हो जाएगा।

इन बातों का रखना होगा ध्यान

  • कोई डिजिटल लॉक नहीं: यह समझना जरूरी है कि यह कोड वेबसाइट पर कोई ताला नहीं लगाता। यह सिर्फ वेबसाइट मालिक की प्राथमिकता बताने का एक तरीका है। AI कंपनियों को ईमानदारी से इस नियम का सम्मान करना होगा।

  • पुराना डेटा डिलीट नहीं होगा: यह नियम केवल भविष्य में होने वाली AI ट्रेनिंग के लिए है। जो डेटा पहले से ही AI को ट्रेन करने में इस्तेमाल हो चुका है, वह इसके जरिए वापस नहीं आएगा।

  • कानूनी पाबंदी नहीं: फिलहाल यह एक तकनीकी प्रस्ताव है, इसे लागू करने के लिए अभी कोई सख्त कानूनी बाध्यता नहीं है।