खेजड़ी आंदोलन खत्म कराने दो मंत्री बीकानेर पहुंचे: मंच पर राजनीतिक पार्टियों को जगह नहीं, यह किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं

बीकानेर में राज्य वृक्ष खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई रोकने के लिए चल रहे 'खेजड़ी बचाओ' आंदोलन का चौथा दिन जारी है। हजारों लोग, जिसमें बिश्नोई समाज के संत, महिलाएं और पर्यावरण प्रेमी शामिल हैं, आमरण अनशन पर डटे हुए हैं। कई अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ने पर अस्थायी अस्पताल बनाया गया। सरकार ने बातचीत के लिए कौशल मंत्री के.के. विश्नोई और जीव-जंतु कल्याण बोर्ड अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई को भेजा, जो अनशन स्थल पहुंचे। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सर्वसमाज का आंदोलन है, किसी राजनीतिक पार्टी का नहीं—इसलिए मंच पर किसी दल को जगह नहीं दी गई। मांग है—खेजड़ी कटाई पर सख्त कानून, भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
February 5, 2026 • 12:01 PM  2.9k
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राजस्थान
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खेजड़ी आंदोलन खत्म कराने दो मंत्री बीकानेर पहुंचे: मंच पर राजनीतिक पार्टियों को जगह नहीं, यह किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं
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खेजड़ी आंदोलन खत्म कराने दो मंत्री बीकानेर पहुंचे: मंच पर राजनीतिक पार्टियों को जगह नहीं, यह किसी पार्टी का कार्यक्रम नहीं

बीकानेर में राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण को लेकर चल रहे 'खेजड़ी बचाओ' आंदोलन ने अब गंभीर रूप ले लिया है। यह आंदोलन 2 फरवरी 2026 से शुरू हुआ था और गुरुवार (5 फरवरी 2026) को इसका चौथा दिन था। आंदोलनकारियों की मांग है कि खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई पर सख्त कानून बनाया जाए, जिसमें कटाई पर भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान हो, ताकि थार मरुस्थल की जीवनरेखा मानी जाने वाली इस वृक्ष की रक्षा हो सके।

मंत्री और नेताओं का अनशन स्थल पर दौरा

आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच राजस्थान सरकार ने गंभीरता दिखाई है। कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता मंत्री के.के. विश्नोई और राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई गुरुवार सुबह करीब 11 बजे अनशन स्थल पर पहुंचे। इस दौरान आंदोलनकारियों ने खेजड़ी बचाने के समर्थन में जोरदार नारेबाजी की। सरकार ने बातचीत के लिए तीन नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसमें भाजपा उपाध्यक्ष बिहारीलाल बिश्नोई भी शामिल हैं।

के.के. विश्नोई अपनी बहन के घर और जसवंत बिश्नोई सर्किट हाउस में ठहरे हुए थे। आंदोलन से जुड़े रामगोपाल बिश्नोई ने बताया कि सरकार को पहले यह धारणा थी कि आंदोलन कांग्रेस नेताओं द्वारा लीड किया जा रहा है, लेकिन आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सर्वसमाज का आंदोलन है, जिसकी अगुवाई मुख्य रूप से बिश्नोई समाज कर रहा है।

राजनीतिक दलों को मंच से दूर रखा

आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया कि यह किसी राजनीतिक पार्टी विशेष का कार्यक्रम नहीं है। मंच पर किसी भी राजनीतिक दल के नेताओं को जगह नहीं दी गई। राष्ट्रीय लोकतांटत्रिक पार्टी (RLP) के नेताओं को भी मंच पर बैठने की अनुमति नहीं मिली। बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भंवर सिंह भाटी और गोविंदराम मेघवाल भी अनशन स्थल पर नहीं दिखे। आंदोलनकारियों का जोर इस बात पर है कि यह पर्यावरण और आस्था से जुड़ा जनआंदोलन है, न कि राजनीतिक।

अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल बनाया गया

आंदोलन के चौथे दिन भी सैकड़ों लोग आमरण अनशन पर डटे हुए हैं। बुधवार देर रात से कई अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ गई। CMHO पुखराज साध के अनुसार, बिश्नोई धर्मशाला में बने अस्थायी अस्पताल में 18 अनशनकारी भर्ती हैं। पीबीएम अस्पताल में 4 लोगों को भर्ती किया गया था, जिनमें से दो को छुट्टी दे दी गई है। कुल मिलाकर 21 से अधिक अनशनकारियों की हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

कड़ाके की सर्दी में खुले आसमान के नीचे अनशन जारी होने से हालात और गंभीर हो गए हैं। पिछले दिनों 363 से अधिक संतों, महिलाओं और पर्यावरण प्रेमियों ने अनशन की शपथ ली थी, और संख्या बढ़कर 450 से अधिक पहुंच गई है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि और मांगें

खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है और बिश्नोई समाज की परंपरा में इसे विशेष महत्व प्राप्त है। 1730 में अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने खेजड़ी बचाने के लिए बलिदान दिया था। आज फिर वही भावना जागृत हो रही है। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है:खेजड़ी कटाई पर सख्त कानून बनाना,कटाई पर करोड़ों का जुर्माना और लंबी सजा का प्रावधान,लिखित आश्वासन देना कि मांगें पूरी होंगी।

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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