इस साल 8 नवंबर को दीपोत्सव मनाया जाएगा, लेकिन इससे ठीक पहले 1 नवंबर, रविवार को खरीदारी और नए कार्यों के श्रीगणेश के लिए एक बेहद शुभ अवसर आ रहा है। इस दिन रविवार और पुष्य नक्षत्र के मिलन से 'रवि पुष्य नक्षत्र' का महासंयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इसे स्थिरता, समृद्धि और हर तरह के मांगलिक कार्यों के लिए बेहद फलदायी माना गया है।
क्यों इतना खास है रवि पुष्य योग?
ज्योतिष के अनुसार, रविवार के स्वामी सूर्य देव हैं, जो मान-सम्मान, नेतृत्व, प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास के प्रतीक माने जाते हैं। वहीं, पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा कहा जाता है, जो जीवन में स्थिरता और शुभता लाता है। इन दोनों के संयोग में किए गए शुभ कार्य और नई शुरुआत व्यक्ति को जीवन में अपार सफलता, प्रसिद्धि और लाभ दिलाते हैं।
किन चीजों की खरीदारी करना है शुभ?
रवि पुष्य नक्षत्र में निवेश और खरीदारी करना बहुत मंगलकारी होता है। इस दिन आप ये चीजें खरीद सकते हैं:
-
सोना-चांदी और आभूषण।
-
नया वाहन, घर या प्लॉट।
-
व्यापार से जुड़ी महत्वपूर्ण वस्तुएं।
-
व्यापारी वर्ग इस दिन अपने नए बहीखातों की शुरुआत कर सकते हैं।
सूर्यास्त से पहले निपटा लें ये काम
अगर आप इस दिन नई गाड़ी की डिलीवरी लेने का प्लान बना रहे हैं, तो कोशिश करें कि यह काम सूर्यास्त से पहले पूरा हो जाए। इसी तरह, नए घर या प्लॉट की बुकिंग और किसी भी नए काम की शुरुआत भी सूर्यास्त से पहले करना अधिक शुभ रहेगा। रोजमर्रा की जरूरत की अन्य चीजें आप अपनी सुविधा के अनुसार शुभ चौघड़िया देखकर खरीद सकते हैं।
सप्तमी तिथि पर सूर्य देव और लक्ष्मी-गणेश पूजन का महत्व
1 नवंबर को पुष्य नक्षत्र के साथ सप्तमी तिथि का भी संयोग है। इस दिन भगवान सूर्य की उपासना का विशेष विधान है।
-
तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें और 'ऊँ सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करें।
-
घर या कार्यस्थल पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करें।
-
इस शुभ अवसर पर जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करने से घर में बरकत और खुशहाली आती है।