त्योहारी सीजन में जहां एक तरफ शहर के बाजार रोशनी और ग्राहकों से गुलजार हैं, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले ट्रैक्टर उद्योग में इस बार सन्नाटा पसरा हुआ है। खेतों में लहलहाने वाली उम्मीदों पर इस बार भीषण अकाल और कम बारिश ने पानी फेर दिया है, जिसका सीधा असर धनतेरस और दिवाली पर होने वाली ट्रैक्टरों की बिक्री पर पड़ा है।

ट्रैक्टर शोरूमों में छाई मायूसी, बिक्री 250 के पार भी नहीं

आमतौर पर किसान धनतेरस और दिवाली के मौके पर समृद्धि के प्रतीक के रूप में नए ट्रैक्टर की पूजा कर उसे घर ले जाते हैं। पिछले साल दिवाली के सीजन में प्रमुख डीलरशिप और शोरूमों से करीब 600 ट्रैक्टरों की धमाकेदार डिलीवरी हुई थी। वहीं, इस बार यह आंकड़ा 200 से 250 तक भी नहीं पहुंच पाया है।

डीलर्स के मुताबिक, इस साल खरीफ की फसल (बाजरा, मूंग, ग्वार, तिल आदि) की अच्छी पैदावार न होने से किसानों के हाथ में नकदी नहीं आई है। फसल खराब होने के कारण किसानों के लिए नया ट्रैक्टर खरीदना और उसकी ईएमआई भरना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। यही वजह है कि जिन शोरूमों में पैर रखने की जगह नहीं होती थी, वहां अब मायूसी छाई है।

ई-बाइक्स की मांग में जबरदस्त उछाल

जहां कृषि प्रधान क्षेत्रों के ऑटोमोबाइल बाजारों (ट्रैक्टर) में चिंताजनक स्थिति है, वहीं दुपहिया वाहनों और खासकर ई-बाइक्स की बिक्री में तेजी आई है। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों की वजह से लोगों का रुझान ई-बाइक्स की तरफ तेजी से बढ़ा है। पिछले एक महीने के अंदर ही शहर में 6 से 7 नए ई-बाइक के शोरूम खुल गए हैं।

कपड़ा, किराना और इलेक्ट्रॉनिक बाजार में बूम

ट्रैक्टर बाजार भले ही ठंडा हो, लेकिन बाड़मेर शहर के स्टेशन रोड बाजार में दिवाली की खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। शाम होते ही भारी भीड़ के चलते स्टेशन रोड पर जाम की स्थिति बन जाती है।

  • किराना और हैंडलूम: किराना और हैंडलूम की दुकानों पर सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है।

  • गारमेंट्स और मॉल: कपड़ा मार्केट और मॉल्स में खरीदारी के लिए लोगों का जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स और बर्तन: इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स और स्टील के बर्तनों की दुकानों पर भी अच्छी खासी भीड़ है।

हर साल दिवाली पर खरीदारी के रिकॉर्ड टूटते हैं क्योंकि खरीफ फसल से आई नकदी को किसान जमीन, सोना या ट्रैक्टर जैसी चीजों में निवेश करते हैं। लेकिन इस बार बारिश की कमी ने किसानों की इस त्योहारी रौनक और बड़े निवेश की क्षमता को छीन लिया है।