क्या एक ‘गुप्त इंजेक्शन’ के जरिए चुपचाप चल रहा था करोड़ों का बड़ा खेल… और मरीजों को इसकी भनक तक नहीं लगी? क्या भरोसे के नाम पर कहीं उनकी सेहत से खिलवाड़ तो नहीं हो रहा था?

एक रहस्यमयी इंजेक्शन… एक ऑनलाइन नेटवर्क… और भरोसेमंद मेडिकल सिस्टम के पीछे छिपा बड़ा खेल। एक मामूली जांच से शुरू हुई कहानी अब गहराते रहस्य में बदल चुकी है… सच क्या है, ये अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है।

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor
April 12, 2026 • 10:48 AM  16
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राजस्थान
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क्या एक ‘गुप्त इंजेक्शन’ के जरिए चुपचाप चल रहा था करोड़ों का बड़ा खेल… और मरीजों को इसकी भनक तक नहीं लगी? क्या भरोसे के नाम पर कहीं उनकी सेहत से खिलवाड़ तो नहीं हो रहा था?
“क्या एक ‘गुप्त इंजेक्शन’ के जरिए चुपचाप चल रहा था करोड़ों का बड़ा खेल… और मरीजों को इसकी भनक तक नहीं लगी? क्या भरोसे के नाम पर कहीं उनकी सेहत से खिलवाड़ तो नहीं हो रहा था?”
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12 Apr 2026
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क्या एक ‘गुप्त इंजेक्शन’ के जरिए चुपचाप चल रहा था करोड़ों का बड़ा खेल… और मरीजों को इसकी भनक तक नहीं लगी? क्या भरोसे के नाम पर कहीं उनकी सेहत से खिलवाड़ तो नहीं हो रहा था?

राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने मेडिकल सिस्टम और मरीजों की सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नपुंसकता के इलाज के नाम पर अवैध इंजेक्शन का कारोबार चल रहा था—और इसका मास्टरमाइंड कोई बाहरी नहीं, बल्कि एक बड़े निजी अस्पताल से जुड़ा शख्स निकला।

पूरी कहानी की शुरुआत गुजरात के सूरत से हुई, जहां ड्रग्स डिपार्टमेंट की एक रूटीन जांच के दौरान “TRIMIX” नाम के संदिग्ध इंजेक्शन का खुलासा हुआ। हैरानी की बात ये थी कि यह इंजेक्शन भारत के सर्वोच्च दवा नियामक Drugs Controller General of India (DCGI) से अप्रूव ही नहीं था।

जांच आगे बढ़ी तो इसके तार जयपुर के एक नामी अस्पताल—Bhandari Hospital—तक जा पहुंचे। 9 अप्रैल को जब ड्रग्स डिपार्टमेंट ने यहां छापा मारा, तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

कैसे चलता था पूरा खेल?

जांच में सामने आया कि अस्पताल के डॉक्टर तीन अलग-अलग दवाओं को मिलाकर मरीजों को इंजेक्शन देते थे। हालांकि “TRIMIX” नाम से कोई आधिकारिक दवा मौजूद नहीं है, लेकिन इसी फॉर्मूले को कथित तौर पर डॉक्टर के पूर्व असिस्टेंट ने सीख लिया।

इस असिस्टेंट—मनीष सोनी—पर आरोप है कि उसने इस फॉर्मूले का गलत इस्तेमाल करते हुए खुद ही अवैध इंजेक्शन बनाना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, उसने “Oh Man” नाम के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर मरीजों तक इसकी सप्लाई भी शुरू कर दी।

देश ही नहीं, विदेश तक फैला नेटवर्क

जांच में यह भी सामने आया कि यह अवैध इंजेक्शन सिर्फ भारत के अलग-अलग शहरों—जैसे नागपुर, अहमदाबाद और हरियाणा—तक ही सीमित नहीं था, बल्कि युगांडा, सऊदी अरब और कोरिया जैसे देशों तक भी भेजा जा रहा था।

चौंकाने वाली बात यह है कि विदेशी मरीजों से एक इंजेक्शन के लिए 800 से 1600 डॉलर तक वसूले जा रहे थे। दवाओं को छुपाकर भेजने के लिए कभी घड़ी के डिब्बों का इस्तेमाल किया गया, तो कभी अन्य चालाक तरीके अपनाए गए।

मरीजों की जान से खिलवाड़?

मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि अलग-अलग दवाओं को मिलाकर बिना अप्रूवल इंजेक्शन देना बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे मरीजों को गंभीर साइड इफेक्ट्स का खतरा रहता है।

इसके अलावा, कुछ मामलों में मरीजों को दूसरी डोज खुद लगाने के लिए दे दी जाती थी—जो और भी ज्यादा जोखिम भरा कदम माना जा रहा है।

पैसों का खेल और धोखाधड़ी

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, आरोपी असिस्टेंट ने 400-500 मरीजों से सीधे अपने अकाउंट में पैसे मंगवाए और करीब 80-90 लाख रुपए की धोखाधड़ी की।

हॉस्पिटल का क्या कहना है?

अस्पताल प्रबंधन ने इस पूरे मामले से खुद को अलग बताते हुए कहा है कि “TRIMIX” नाम का कोई इंजेक्शन उनके यहां आधिकारिक रूप से इस्तेमाल नहीं होता। उनका दावा है कि इलाज पूरी तरह तय प्रोटोकॉल के अनुसार ही किया जाता है।

बड़ा सवाल…

इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

  • क्या मरीजों की सुरक्षा से समझौता किया गया?
  • क्या मेडिकल सिस्टम में निगरानी की कमी है?
  • और सबसे अहम… कितने लोग इस अवैध इलाज का शिकार हुए?

यह मामला सिर्फ एक अस्पताल या एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे हेल्थ सिस्टम के लिए चेतावनी है।

TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor

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