डिप्टी CM प्रेमचंद बैरवा बनकर कराया ट्रांसफर! वॉइस मॉडिफिकेशन ऐप से रची साजिश, नर्सिंग ऑफिसर पर आरोप

अजमेर में एक नर्सिंग ऑफिसर पर डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के नाम से फर्जी कॉल कर अपना तबादला कराने का आरोप लगा है।

Kashish Sain
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
June 25, 2026 • 1:06 PM  3
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राजस्थान
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डिप्टी CM प्रेमचंद बैरवा बनकर कराया ट्रांसफर! वॉइस मॉडिफिकेशन ऐप से रची साजिश, नर्सिंग ऑफिसर पर आरोप
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25 Jun 2026
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डिप्टी CM प्रेमचंद बैरवा बनकर कराया ट्रांसफर! वॉइस मॉडिफिकेशन ऐप से रची साजिश, नर्सिंग ऑफिसर पर आरोप

राजस्थान के अजमेर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नर्सिंग ऑफिसर पर उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के नाम से फर्जी कॉल कर अपना तबादला कराने का आरोप लगा है। आरोप है कि उसने वॉइस मॉडिफिकेशन ऐप की मदद से आवाज बदलकर खुद को डिप्टी सीएम बताने का नाटक किया और विभागीय अधिकारियों पर दबाव बनाकर ट्रांसफर करवाया।

वॉइस मॉडिफिकेशन ऐप से बदली आवाज

जानकारी के अनुसार आरोपी नर्सिंग ऑफिसर ने मोबाइल तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अपनी आवाज, नंबर और प्रोफाइल बदल ली। इसके बाद उसने खुद को उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा बताकर अधिकारियों से संपर्क किया और अपने तबादले की सिफारिश करवाई।

बताया जा रहा है कि फर्जी कॉल के दौरान अधिकारियों पर दबाव भी बनाया गया, जिसके बाद ट्रांसफर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

जेएलएन अस्पताल अधीक्षक ने किया खुलासा

जेएलएन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे ने बताया कि डिप्टी सीएम के नाम से एक कॉल प्राप्त हुआ था, जिसमें किशनगढ़ में कार्यरत एक नर्सिंग ऑफिसर को अजमेर में पोस्टिंग देने की सिफारिश की गई थी। कॉल के आधार पर उसे अजमेर में पदस्थापित भी कर दिया गया।

बाद में जांच में सामने आया कि कॉल कथित रूप से उसी नर्सिंग ऑफिसर ने किया था, जिसने तकनीकी माध्यम से अपनी पहचान छिपाकर अधिकारियों को गुमराह किया।

कई बार कराया तबादला

सूत्रों के अनुसार संबंधित नर्सिंग ऑफिसर पहले अजमेर के सैटेलाइट अस्पताल में तैनात था। शिकायतों के बाद उसका तबादला दूसरे जिले में कर दिया गया था। इसके बाद वह दोबारा अजमेर के जेएलएन अस्पताल में पोस्टिंग कराने में सफल रहा।

फिर उसका ट्रांसफर किशनगढ़ किया गया, लेकिन कुछ समय बाद वह फिर से अजमेर में पोस्टिंग हासिल करने में कामयाब हो गया। आरोप है कि इन तबादलों के पीछे फर्जी कॉल और प्रभाव का इस्तेमाल किया गया।

नेता के पीए को धमकाने से खुली पोल

मामले का खुलासा तब हुआ जब नर्सिंग ऑफिसर ने पहले ट्रांसफर करवाने वाले एक नेता के निजी सहायक (PA) को अपना रुतबा दिखाने और धमकाने की कोशिश की। इसके बाद पूरे मामले की पड़ताल शुरू हुई और कथित फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।

जांच में सामने आया कि डिप्टी सीएम के नाम का इस्तेमाल कर अधिकारियों को प्रभावित किया गया था। मामला अब उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा तक भी पहुंच चुका है।

शिकायत का इंतजार, कार्रवाई बाकी

फिलहाल पुलिस के पास इस मामले की मौखिक जानकारी पहुंची है, लेकिन अभी तक कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस अधीक्षक का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी विभागों में ट्रांसफर प्रक्रिया और डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला सरकारी सिस्टम में पहचान की फर्जीवाड़े और साइबर तकनीक के दुरुपयोग का बड़ा उदाहरण बन सकता है।

Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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