CJP प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा चाबुक, तुरंत बैरिकेड्स हटाने और मेट्रो शुरू करने का फरमान!

सुप्रीम कोर्ट ने CJP के विरोध प्रदर्शन के कारण दिल्ली मेट्रो स्टेशनों के बंद होने और धारा 163 लागू करने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बैरिकेड्स हटाने और लोगों की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

yashaswani
yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026 Sub Editor
October 11, 2026 • 4:23 PM  103
भ
भारत
NEWS CARD
Logo
CJP प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा चाबुक, तुरंत बैरिकेड्स हटाने और मेट्रो शुरू करने का फरमान!
“CJP प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा चाबुक, तुरंत बैरिकेड्स हटाने और मेट्रो शुरू करने का फरमान!”
Favicon
Read more on www.thekhatak.com/s/d358ae
11 Oct 2026
https://www.thekhatak.com/s/d358ae
Google News
Copied
CJP प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा चाबुक, तुरंत बैरिकेड्स हटाने और मेट्रो शुरू करने का फरमान!

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के कारण मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष बैठक (Special Sitting) में अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक "अत्यंत आवश्यक" न हो, दिल्ली से सभी बैरिकेड्स हटा दिए जाने चाहिए।

याचिकाकर्ता और वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने मेट्रो स्टेशनों को लगातार बंद रखने को अदालत की अवमानना बताया था। इस पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लोगों की मुक्त आवाजाही (Free Movement) को जल्द से जल्द सामान्य किया जाना चाहिए।

न्याय तक पहुंच बाधित न हो: धारा 163 हटाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 (जो बड़ी सभाओं पर प्रतिबंध लगाती है) को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का निर्देश दिया है।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने कहा, "हमें सूचित किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आसपास धारा 163 लागू की गई है। हम अधिकारियों को इस प्रतिबंध को हटाने का निर्देश देते हैं ताकि सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य अदालत में आने-जाने और न्याय तक पहुंच में किसी भी प्रकार की कोई बाधा उत्पन्न न हो।"

विरोध का अधिकार पुलिस अधिनियम के दायरे में हो

इससे पहले शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के कारण दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर "पूर्ण प्रतिबंध" न हो, क्योंकि "सब कुछ ठप नहीं किया जा सकता।"

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों और याचिकाकर्ताओं को याद दिलाया कि विरोध करना एक अधिकार है, लेकिन यह कानून के दायरे में होना चाहिए। कोर्ट ने कहा, "आपको विरोध करने का अधिकार है, इस पर कोई विवाद नहीं है, लेकिन आपके विरोध की प्रक्रिया पुलिस अधिनियम (Police Act) के अंतर्गत होनी चाहिए।"

दिल्ली पुलिस और DMRC को नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों और उससे जुड़ी परिस्थितियों को लेकर दिल्ली पुलिस, केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इन सभी से मंगलवार तक अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) सौंपने को कहा है।

क्या है पूरा मामला?

CJP और अन्य विपक्षी दल SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर पार्टी द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया था, जिसके चलते प्रशासन ने मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया था और धारा 163 लागू कर दी थी।

वकीलों के लिए विशेष निर्देश

इस विशेष बैठक में सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर भी सुनवाई की। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को सख्त निर्देश दिए कि वकीलों को "उनके पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन में किसी भी तरह से बाधित न किया जाए।" हालांकि, अदालत ने वकीलों को भी नसीहत दी कि यदि वे वास्तव में किसी मुद्दे को लेकर चिंतित हैं, तो उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करना चाहिए और आम लोगों को उकसाने से बचना चाहिए।

yashaswani Verified Public Figure • 17 Aug, 2026 Sub Editor

Digital Archives

home Home amp_stories Web Stories local_fire_department Trending play_circle Videos mark_email_unread Newsletter