बीकानेर।   राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामले में अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार की अदालत ने मंगलवार (25 नवंबर 2025) को एक ही परिवार के 11 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई। ये सभी लोग एक पुराने मारपीट के मामले में गवाह बनने जा रहे व्यक्ति और उसके बेटे पर जानलेवा हमला करने के दोषी पाए गए। हमलावरों ने कुल्हाड़ी, लाठियों और लोहे की रॉड से वार करके गवाह के दोनों पैर तोड़ दिए थे। पीड़ित के पैरों में 10 जगह गंभीर फ्रैक्चर हुए थे, जिससे वह आजीवन विकलांग हो गया।

घटना कब और कैसे हुई? घटना 4 मार्च 2019 की है। पीड़ित जयसुखराम अपने रिश्ते के भाई धुड़ाराम मेघवाल के साथ हुई मारपीट के मामले में नोखा कोर्ट में गवाही देने जा रहा था। उसी दिन वह अपने बेटे के साथ दवा लेने भी जा रहा था।रास्ते में आरोपी परिवार के लोगों ने पहले से घात लगाकर रखी थी। जैसे ही जयसुखराम और उसका बेटा आए, 11 आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और कुल्हाड़ी, लाठियां व लोहे की रॉड से निर्मम तरीके से हमला कर दिया। हमले का मकसद साफ था – कोर्ट में गवाही न देने के लिए डराना-धमकाना और अगर नहीं माने तो जान से मार देना।हमले में जयसुखराम के दोनों पैर बुरी तरह टूट गए। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार उनके पैरों में कुल 10 जगह फ्रैक्चर थे। इलाज के बावजूद वह ठीक से चल फिर नहीं पाता और आजीवन लाठी के सहारे रहना पड़ता है।

कोर्ट ने क्या कहा? लगभग 6 साल चली सुनवाई के बाद अपर सत्र न्यायाधीश मुकेश कुमार ने सभी 11 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की निम्न धाराओं में सजा सुनाई:धारा 307 (हत्या का प्रयास) धारा 143, 147, 148 (गैरकानूनी जमावड़ा एवं दंगा) धारा 323, 325 (मारपीट एवं स्वेच्छा से गंभीर चोट पहुंचाना) धारा 458 (रात में घर में घुसकर हमला) आदि ,सभी को उम्रकैद (आजीवन कारावास) के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया गया। कोर्ट ने इसे “जघन्य एवं दुर्लभ से दुर्लभतम” (rarest of rare) श्रेणी का अपराध माना और कहा कि गवाहों पर इस तरह का हमला न्याय व्यवस्था पर सीधा आघात है।

दोषी कौन-कौन हैं? (सभी एक ही परिवार के)बृजलाल पुत्र बीरबलराम ,देवीलाल पुत्र बृजलाल ,सुंदरलाल पुत्र गोपीलाल ,शिवलाल पुत्र बीरबलराम ,सुखाराम पुत्र बृजलाल ,सोहनलाल पुत्र बीरबलराम ,गोपीराम पुत्र बीरबलराम ,रामकुमार पुत्र बीरबलराम ,मांगीलाल पुत्र गोपीराम ,प्रदीप पुत्र बृजलाल, रामस्वरूप पुत्र बीरबलराम ,इनमें 6 सगे या चचेरे भाई हैं और बाकी उनके बेटे/पोते। सभी नोखा क्षेत्र के रहने वाले हैं।

पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया;  फैसला आने के बाद पीड़ित जयसुखराम और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली। जयसुखराम ने कहा, “6 साल से हम डरे-सहमे जी रहे थे। आज न्याय मिला। मेरे पैर वापस नहीं आएंगे, लेकिन कम से कम अब आरोपी सलाखों के पीछे हैं।”यह मामला राजस्थान में गवाहों पर हमले और पंचायती दबंगई की बढ़ती घटनाओं पर एक कड़ा संदेश है कि न्यायपालिका अब ऐसे अपराधों में सख्ती बरत रही है।