बाड़मेर में संविदाकर्मी द्वारा फर्जी MLC का मामला: वायरल वीडियो में घायलों का इलाज करते नजर आए संविदा कर्मचारी, कोर्ट के आदेश पर दोबारा जांच में कोई चोट नहीं

बाड़मेर के गरीब पीएचसी में संविदा कर्मचारी हठेसिंह ने खुद को डॉक्टर बताकर फर्जी MLC बनाई। वायरल वीडियो सामने आने और शिकायत के बावजूद 14 दिन बाद भी जांच नहीं हुई। कोर्ट के आदेश पर दोबारा MLC में कोई गंभीर चोट नहीं मिली। मामला दीपावली के दिन हुई मारपीट का है।

Mohit Parihar
Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
November 20, 2025 • 1:18 PM  16
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राजस्थान
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बाड़मेर में संविदाकर्मी द्वारा फर्जी MLC का मामला: वायरल वीडियो में घायलों का इलाज करते नजर आए संविदा कर्मचारी, कोर्ट के आदेश पर दोबारा जांच में कोई चोट नहीं
“बाड़मेर में संविदाकर्मी द्वारा फर्जी MLC का मामला: वायरल वीडियो में घायलों का इलाज करते नजर आए संविदा कर्मचारी, कोर्ट के आदेश पर दोबारा जांच में कोई चोट नहीं”
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20 Nov 2025
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बाड़मेर में संविदाकर्मी द्वारा फर्जी MLC का मामला: वायरल वीडियो में घायलों का इलाज करते नजर आए संविदा कर्मचारी, कोर्ट के आदेश पर दोबारा जांच में कोई चोट नहीं

बाड़मेर, 20 नवंबर 2025: राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और फर्जी मेडिकल रिपोर्ट का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो वीडियोज में एक संविदा कर्मचारी (कॉन्ट्रैक्ट वर्कर) को घायल मरीजों की मेडिकल लीगल सर्टिफिकेट (MLC) तैयार करते हुए साफ देखा जा सकता है। पीड़ित पक्ष ने इसकी शिकायत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को लिखित में दी है, लेकिन 14 दिनों बाद भी विभागीय जांच शुरू नहीं हुई। आखिरकार कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने MLC दोबारा करवाई, जिसमें पीड़ित को कोई गंभीर चोट नहीं पाई गई। यह घटना जिले के गरीब थाना इलाके की है, जहां दीपावली के दौरान दो पक्षों के बीच हुई झड़प के बाद यह विवाद उभरा।

घटना का पूरा विवरण: दीपावली पर हुई मारपीट और फर्जी रिपोर्ट मामला 20 अक्टूबर 2025 को दीपावली के दिन बाड़मेर जिले के गरीब थाना क्षेत्र के जीणे की बस्ती (तहसील गडरा रोड) का है। यहां दो पक्षों के बीच मामूली कहासुनी के बाद झगड़ा हो गया। एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर मारपीट का आरोप लगाया। पीड़ित कचरा राम (पुत्र सगुड़ाराम, निवासी जीणे की बस्ती) ने अगले ही दिन यानी 21 अक्टूबर को गरीब थाना पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करवाई। पीड़ित ने बताया कि मारपीट के दौरान उसे चोटें आईं, जिसके बाद वह इलाज के लिए गरीब हॉस्पिटल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पहुंचा।लेकिन PHC में जो कुछ हुआ, वह बेहद शर्मनाक था। पीड़ित के अनुसार, वहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर नरेंद्र मीणा उपस्थित नहीं थे। उनकी जगह एक संविदा कर्मचारी हठेसिंह ने खुद को डॉक्टर बताते हुए इलाज शुरू कर दिया। हठेसिंह ने पीड़ित को कहा, "मेडिकल मेरी ओर से किया जाएगा।" फिर उसने एक कच्चे कागज पर हस्ताक्षरित मेडिकल रिपोर्ट तैयार की और पीड़ित को सौंप दी। इस रिपोर्ट में पीड़ित की चोटों को गंभीर बताकर MLC जारी किया गया, जो पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए आधार बनी। पीड़ित कचरा राम ने बताया, "मुझे लगा कि यह आधिकारिक रिपोर्ट है, लेकिन बाद में पता चला कि यह पूरी तरह फर्जी थी। डॉक्टर तो वहां थे ही नहीं।"

बीते कुछ घंटों में सोशल मीडिया पर दो वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। इनमें हठेसिंह नामक संविदा कर्मचारी को PHC में घायल मरीजों का इलाज करते और MLC तैयार करते साफ देखा जा सकता है। वीडियो में वह बिना किसी चिकित्सा योग्यता के मरीजों को दवाइयां देते और रिपोर्ट लिखते नजर आ रहा है। पीड़ित पक्ष ने इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिलते ही CMHO को लिखित शिकायत सौंप दी। शिकायत में हठेसिंह पर फर्जी MLC बनाने, डॉक्टर बनकर इलाज करने और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का आरोप लगाया गया।शिकायत मिलने के बाद CMHO ने तुरंत दो डॉक्टरों की जांच टीम गठित की और तीन दिनों में रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए। लेकिन करीब 14 दिन बीत चुके हैं, फिर भी कोई जांच रिपोर्ट नहीं आई। विभाग की इस सुस्ती से पीड़ित पक्ष नाराज है। जब इस बारे में CMHO से बात की गई, तो उन्होंने कहा, "कल डॉक्टर को बुलाकर जांच करवा दी जाएगी। टीम गठित है, लेकिन व्यस्तता के कारण देरी हो गई।" हालांकि, CMHO का यह जवाब पीड़ितों को संतुष्ट नहीं कर सका, जो अब उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

कोर्ट का हस्तक्षेप: दोबारा MLC में कोई इंजरी नहीं इस पूरे प्रकरण ने तूल तब पकड़ा जब आरोपी पक्ष ने फर्जी MLC का हवाला देकर पुलिस और कोर्ट में आपत्ति जताई। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित की चोटें हल्की हैं और मूल MLC में अतिशयोक्ति की गई है। कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए पुलिस को निर्देश दिए कि पीड़ित का MLC किसी योग्य डॉक्टर से दोबारा करवाया जाए। पुलिस ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए पीड़ित कचरा राम का दोबारा मेडिकल परीक्षण करवाया। नई रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की गंभीर चोट या इंजरी की पुष्टि नहीं हुई। यह खुलासा आरोपी पक्ष के दावों को मजबूत करता है और फर्जी MLC के आरोपों को बल देता है।

स्वास्थ्य विभाग पर सवाल: संविदाकर्मियों की मनमानी? यह मामला बाड़मेर के स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। PHC जैसे ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी लंबे समय से एक समस्या रही है। ऐसे में संविदा कर्मचारियों को जिम्मेदारियां सौंपी जाती हैं, लेकिन उनकी योग्यता और प्रशिक्षण पर सवाल उठते रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि MLC जैसी संवेदनशील प्रक्रिया केवल पंजीकृत चिकित्सकों द्वारा ही की जानी चाहिए, क्योंकि यह कानूनी मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि फर्जी रिपोर्ट साबित हो गई, तो न केवल आरोपी पक्ष को फायदा होगा, बल्कि पीड़ित की FIR भी कमजोर पड़ सकती है।

आगे क्या? जांच और कार्रवाई की उम्मीद वर्तमान में मामला कोर्ट और पुलिस के पास है। पीड़ित पक्ष ने CMHO के अलावा जिला कलेक्टर और मेडिकल विभाग के उच्च अधिकारियों को भी अवगत कराया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के कारण यह मुद्दा अब स्थानीय स्तर से ऊपर उठ चुका है। हठेसिंह पर अभी तक कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई है, लेकिन यदि जांच रिपोर्ट आई, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। बाड़मेर के ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाती हैं, जहां मरीजों को सही इलाज मिलना तो दूर, फर्जी दस्तावेजों का शिकार होना पड़ रहा है।

 

Mohit Parihar Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.

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