मौत के साये में मासूमों की शादी: राजस्थान के गाँवों में बाल विवाह की चौंकाने वाली प्रथा और आधुनिक युग में इसका भयावह सच"

रिश्ते तलाशने से लेकर विवाह की रस्में पूरी करने तक का काम कुछ ही घंटों में निपट जाता है। छोटी उम्र की बेटियों को ससुराल भेजा जाता है, फिर अगले दिन या दो दिन बाद वापस लाया जाता है। वयस्क होने पर उन्हें दोबारा ससुराल भेजा जाता है। जो लड़कियाँ पहले से वयस्क हैं, उन्हें तुरंत ससुराल रवाना कर दिया जाता है। यह सब इतनी जल्दबाजी में होता है कि न बच्चों की सहमति ली जाती है, न उनकी भावनाओं का ख्याल रखा जाता है, और न ही रिश्ते की मजबूती पर विचार किया जाता है। यह प्रथा, जो लागत बचाने का रास्ता लगती है

Ashok Shera
Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026 Editor
April 12, 2025 • 6:35 PM  248
राजस्थान
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मौत के साये में मासूमों की शादी: राजस्थान के गाँवों में बाल विवाह की चौंकाने वाली प्रथा और आधुनिक युग में इसका भयावह सच"
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12 Apr 2025
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मौत के साये में मासूमों की शादी: राजस्थान के गाँवों में बाल विवाह की चौंकाने वाली प्रथा और आधुनिक युग में इसका भयावह सच"

पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी गाँवों में, जहाँ रेत के टीलों के बीच समय मानो सदियों पुरानी रीतियों में कैद है, एक ऐसी प्रथा चल रही है जो सुनने में किसी भयावह सपने से कम नहीं। एक परिवार में बुजुर्ग की मृत्यु होती है। शोक की छाया और मृत्युभोज की तैयारियों के बीच, अचानक ढोल-नगाड़ों की गूंज गूंजने लगती है। यह शोक का माहौल नहीं, बल्कि 10 साल की मासूम बच्चियों से लेकर किशोरों तक की आनन-फानन शादियों का तमाशा है। मृत्युभोज के मौके पर, खर्च बचाने के नाम पर बच्चों की जिंदगियाँ दाँव पर लगा दी जाती हैं। यह प्रथा, जो परंपरा का चोला पहने हुए है, आज के डिजिटल युग में बच्चों के सपनों को कुचल रही है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही टूटते रिश्तों, आत्महत्याओं और वैवाहिक कलह की कहानियाँ इसकी भयावह सच्चाई को बयान कर रही हैं। सवाल यह है—क्या यह सामाजिक मजबूरी है, परंपरा का बोझ, या फिर बच्चों के भविष्य के साथ क्रूर मजाक?

मृत्युभोज के साथ शादी: परंपरा या बच्चों का शोषण?

Ashok Shera Official | Verified Expert • 11 Jun, 2026 Editor

"द खटक" एडिटर-इन-चीफ

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