आज भी गुफाओं में रहते हैं 250 लोग... मरने पर वहीं होता है अंतिम संस्कार, कैमरा देखते ही छिप जाते हैं!

केरल के मलप्पुरम-नीलांबूर जंगलों में रहने वाली चोलानाइकन जनजाति आज भी गुफाओं में जीवन जीती है। बाहरी दुनिया से दूर यह समुदाय प्रकृति, शहद और जंगल पर पूरी तरह निर्भर है।

Kashish Sain
Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor
June 2, 2026 • 1:59 PM  18
भारत
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आज भी गुफाओं में रहते हैं 250 लोग... मरने पर वहीं होता है अंतिम संस्कार, कैमरा देखते ही छिप जाते हैं!
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2 Jun 2026
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आज भी गुफाओं में रहते हैं 250 लोग... मरने पर वहीं होता है अंतिम संस्कार, कैमरा देखते ही छिप जाते हैं!

केरल के घने और रहस्यमयी नीलांबूर जंगलों में आज भी एक ऐसी जनजाति निवास करती है, जिसकी जीवनशैली आधुनिक दुनिया से बिल्कुल अलग है। यह है चोलानाइकन जनजाति, जिसे भारत की सबसे अलग-थलग रहने वाली आदिवासी समुदायों में से एक माना जाता है।

जंगलों के बीच रहस्यमयी जीवन

सुबह की हल्की धुंध, घने पेड़ और पथरीले रास्तों के बीच लगभग 5 घंटे की पैदल यात्रा के बाद चट्टानों के बीच काली गुफाएं दिखाई देती हैं। यही चोलानाइकन समुदाय का घर है। जैसे ही बाहरी लोग इन इलाकों में पहुंचते हैं, कुछ लोग गुफाओं में छिप जाते हैं, जबकि कुछ धीरे-धीरे सामने आते हैं।

गुफाओं में जीवन और पूर्वजों की आस्था

इस जनजाति के लोग मानते हैं कि उनके पूर्वज आज भी गुफाओं के रक्षक हैं। वे अपने मृतकों को भी गुफाओं के पास ही दफनाते हैं और मानते हैं कि मिट्टी से दूरी आत्मा को प्रकृति में विलीन कर देती है। यही कारण है कि उनका जीवन पूरी तरह जंगल और गुफाओं से जुड़ा हुआ है।

Kashish Sain Verified Public Figure • 11 Jun, 2026 Sub Editor

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