मैं यहां मरना नहीं चाहता…’ जेल में बीमार पड़े विक्रम भट्ट का दर्द, 30 करोड़ धोखाधड़ी केस फिर सुर्खियों में

फिल्ममेकर विक्रम भट्ट ने जेल में अपने कठिन अनुभव साझा किए हैं। वे 30 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी केस में कुछ समय तक जेल में रहे थे। उन्होंने बताया कि उस दौरान कड़ाके की ठंड में उन्हें तेज बुखार हो गया और सही इलाज न मिलने का आरोप लगाया। भट्ट के अनुसार, जेल अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी थी और डॉक्टर की सलाह के बावजूद समय पर उन्हें बाहर इलाज नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय उन्हें लगा कि शायद वे बाहर नहीं निकल पाएंगे, लेकिन बाद में उनकी तबीयत में सुधार हुआ। यह मामला अभी 30 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है और न्यायिक प्रक्रिया में है।

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TEAM KHATAK Verified Media or Organization • 11 Jun, 2026 Editor
April 15, 2026 • 1:50 PM  12
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मैं यहां मरना नहीं चाहता…’ जेल में बीमार पड़े विक्रम भट्ट का दर्द, 30 करोड़ धोखाधड़ी केस फिर सुर्खियों में
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मैं यहां मरना नहीं चाहता…’ जेल में बीमार पड़े विक्रम भट्ट का दर्द, 30 करोड़ धोखाधड़ी केस फिर सुर्खियों में

फिल्ममेकर विक्रम भट्ट ने जेल में बिताए अपने समय को लेकर कई गंभीर खुलासे किए हैं। वे 30 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में दिसंबर से फरवरी तक न्यायिक हिरासत में रहे थे। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए जेल की परिस्थितियों और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

 ठंड में बिगड़ी तबीयत, तेज बुखार से हालत गंभीर

विक्रम भट्ट के अनुसार, जनवरी के महीने में कड़ाके की ठंड के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें तेज बुखार हो गया था और शरीर लगातार कांप रहा था। उन्होंने बताया कि इतनी ठंड में चार-चार कंबल ओढ़ने के बाद भी राहत नहीं मिल रही थी।

उनका कहना है कि उस समय उनकी हालत इतनी खराब थी कि वे ठीक से उठ भी नहीं पा रहे थे और लगातार कमजोरी महसूस कर रहे थे।

 जेल अस्पताल पर गंभीर सवाल

भट्ट ने अपने बयान में जेल अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार—

  • अस्पताल में बुनियादी जांच उपकरण मौजूद नहीं थे
  • थर्मामीटर तक उपलब्ध नहीं था
  • केवल ऑक्सीजन लेवल चेक करके उन्हें सामान्य बताया गया
  • गंभीर बीमारी के बावजूद उचित मेडिकल जांच नहीं हुई

उन्होंने दावा किया कि उन्हें पहले से एक ऑटोइम्यून बीमारी एक्सियल स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस है, जो बुखार की स्थिति में और अधिक खतरनाक हो सकती है।

 इलाज में देरी और लापरवाही का आरोप

विक्रम भट्ट ने आरोप लगाया कि डॉक्टर द्वारा अस्पताल रेफर किए जाने के बावजूद उन्हें समय पर बाहर इलाज के लिए नहीं ले जाया गया।

उनके अनुसार, कई दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें जेल बैरक में ही दर्द और बुखार के बीच रहना पड़ा।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस और प्रशासनिक स्टाफ कभी VIP ड्यूटी और अन्य कार्यों में व्यस्त थे, जिसके कारण उनकी मेडिकल स्थिति पर ध्यान नहीं दिया गया।

“मैं यहां मरना नहीं चाहता था” – भावुक बयान

अपने अनुभव साझा करते हुए विक्रम भट्ट भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा आ गया था जब उन्हें लगने लगा था कि शायद वे जेल से बाहर नहीं निकल पाएंगे।

उन्होंने कहा कि उस कठिन समय में उन्होंने लगातार भगवान से प्रार्थना की और अपने परिवार को याद किया।

भट्ट ने कहा कि उन्होंने खुद को संभालने के लिए खान-पान नियंत्रित किया, ज्यादा पानी पीना शुरू किया और मानसिक रूप से मजबूत रहने की कोशिश की।

 धीरे-धीरे कैसे मिली राहत

भट्ट के अनुसार, कुछ दिनों बाद उनकी तबीयत में सुधार आने लगा। बुखार धीरे-धीरे कम हुआ और शरीर का दर्द भी कम होने लगा।

उन्होंने इस सुधार को “अप्रत्याशित” बताते हुए इसे एक तरह का भावनात्मक और शारीरिक बदलाव बताया, जिसे उन्होंने एक “चमत्कार” जैसा अनुभव कहा।

 15 दिन की देरी का दावा और प्रशासन पर सवाल

उन्होंने यह भी दावा किया कि डॉक्टर की सलाह के बावजूद उन्हें अस्पताल ले जाने में लगभग 15 दिन की देरी हुई।

जब पुलिस उन्हें लेने पहुंची, तब तक उनकी हालत पहले से काफी बेहतर हो चुकी थी। इस पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद वे उस समय “देर से पहुंचे”।

 पूरा मामला क्या है? (30 करोड़ धोखाधड़ी केस)

यह पूरा मामला राजस्थान के उदयपुर में दर्ज एक FIR से जुड़ा है, जिसे इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने दर्ज कराया था।

आरोपों का विवरण:

  • फिल्म प्रोडक्शन और निवेश के नाम पर बड़े मुनाफे का वादा
  • फिल्मों से 100 से 200 करोड़ रुपये तक रिटर्न का दावा
  • निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रोजेक्ट आधारित समझौते

वित्तीय लेन-देन के आरोप:

  • अलग-अलग खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर होने का दावा
  • लगभग 30 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप
  • कई व्यक्तियों और खातों के नाम शामिल होने की बात

 कानूनी स्थिति

इस मामले में विक्रम भट्ट समेत कई लोगों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई चल रही है। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।

 निष्कर्ष

विक्रम भट्ट का यह बयान एक ओर जहां जेल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करता है, वहीं दूसरी ओर यह 30 करोड़ रुपये के कथित धोखाधड़ी मामले को फिर से चर्चा में ले आया है। फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और जांच जारी है।

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