भीलवाड़ा: कपड़ा फैक्ट्री में जहरीली गैस से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत, प्रबंधन की लापरवाही पर भारी विरोध

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के रायसिंहपुरा में सीताराम डेनिम कपड़ा फैक्ट्री के बॉयलर एरिया में जहरीली गैस लीक होने से दो युवा मजदूरों—गजानंद गाडरी (25) और कमलेश गुर्जर (24)—की मौत हो गई। दोनों सुबह अचेत अवस्था में मिले और अस्पताल में मृत घोषित कर दिए गए। मजदूरों ने प्रबंधन पर प्रशिक्षित ऑपरेटर न रखने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया। पुलिस जांच कर रही है और मामला दर्ज किया जाएगा।

Jan 7, 2026 - 13:04
भीलवाड़ा: कपड़ा फैक्ट्री में जहरीली गैस से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत, प्रबंधन की लापरवाही पर भारी विरोध

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक हृदयविदारक हादसा सामने आया है। रायला थाना क्षेत्र के रायसिंहपुरा गांव में स्थित सीताराम डेनिम कपड़ा फैक्ट्री में बॉयलर एरिया में कार्यरत दो युवा मजदूरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में बॉयलर से निकली जहरीली गैस से दम घुटने की आशंका जताई जा रही है। घटना बुधवार सुबह की है, जिसके बाद फैक्ट्री के अन्य मजदूरों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने अस्पताल और थाने के बाहर जमकर प्रदर्शन किया तथा फैक्ट्री प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया।

हादसे का विवरण: सुबह अचेत मिले दोनों मजदूर

घटना सीताराम डेनिम फैक्ट्री के बॉयलर क्षेत्र में हुई। मृतक मजदूरों की पहचान गजानंद गाडरी (उम्र 25 वर्ष), पुत्र रामचंद्र गाडरी, निवासी जिंद्रास (आसींद) और कमलेश गुर्जर (उम्र 24 वर्ष), पुत्र जीवराज गुर्जर, निवासी नानोड़ी के रूप में हुई है। दोनों मजदूर पिछले छह महीनों से इस फैक्ट्री में कार्यरत थे और उनकी ड्यूटी विशेष रूप से बॉयलर साइट पर थी।बुधवार सुबह करीब 8 बजे अन्य कर्मचारियों ने दोनों को बॉयलर एरिया में जमीन पर अचेत अवस्था में पड़ा देखा। तुरंत सहकर्मियों ने उन्हें एम्बुलेंस से भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में संदेह है कि बॉयलर से रिसाव हुई जहरीली गैस के कारण दोनों का दम घुट गया। हालांकि, मौत के सटीक कारण की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही हो सकेगी।रायला थाना प्रभारी मूलचंद ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। दोनों शवों को महात्मा गांधी अस्पताल की मॉर्च्यूरी में रखवाया गया है। परिजनों और मजदूरों की शिकायत पर फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा और पूरी घटना की गहन जांच की जा रही है।

प्रदर्शन और आक्रोश: अस्पताल के बाहर मजदूरों का विरोध

हादसे की खबर फैलते ही मृतकों के परिजन और फैक्ट्री के सैकड़ों अन्य मजदूर महात्मा गांधी अस्पताल के बाहर एकत्र हो गए। उन्होंने फैक्ट्री प्रबंधन पर जमकर आरोप लगाए और उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। मजदूरों का कहना था कि बॉयलर से गैस लीकेज के कारण यह हादसा हुआ और यह पूरी तरह प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा है।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि: फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की जा रही है।बॉयलर जैसे खतरनाक और संवेदनशील क्षेत्र में प्रशिक्षित ऑपरेटर की नियुक्ति अनिवार्य है, लेकिन प्रबंधन ने कोई प्रशिक्षित स्टाफ नहीं रखा।सामान्य मजदूरों से ही बॉयलर चलवाया जा रहा था, जिससे यह दुर्घटना हुई।पहले भी फैक्ट्री में कई मजदूरों को करंट लगने और गैस से सांस की तकलीफ की शिकायतें आई हैं, लेकिन कोई सुधार नहीं किया गया।मजदूरों ने उचित मुआवजे की मांग के साथ-साथ निष्पक्ष जांच की भी गुहार लगाई। प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि अस्पताल और फैक्ट्री परिसर दोनों जगह तीन थानों की पुलिस फोर्स तैनात करनी पड़ी। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन जांच पूरी होने तक तनाव बना हुआ है।

औद्योगिक सुरक्षा पर उठे सवाल यह हादसा एक बार फिर राजस्थान की फैक्टरियों में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। बॉयलर जैसे हाई-रिस्क क्षेत्र में बिना प्रशिक्षित कर्मचारियों के काम कराना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि मजदूरों की जान जोखिम में डालने वाला कृत्य भी। ग्रामीणों और मजदूरों का आरोप है कि लागत बचाने के चक्कर में प्रबंधन सुरक्षा उपकरणों और ट्रेनिंग पर ध्यान नहीं देता, जिसके चलते ऐसे हादसे बार-बार हो रहे हैं।पुलिस और प्रशासन अब पूरे मामले की जांच में जुट गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के 정확 कारण स्पष्ट होंगे और दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद है। मृतकों के परिवारों के लिए यह अपूरणीय क्षति है, जबकि अन्य मजदूरों में डर और गुस्सा बना हुआ है।

Mohit Parihar Mohit Parihar is a journalist at The Khatak, covering politics and public issues with a strong focus on ground reporting and factual storytelling.