पाली (राजस्थान), जाडन गांव: एक दिल दहला देने वाली घटना ने स्थानीय लोगों के दिलों को झकझोर दिया है। रविवार रात करीब 9 बजे जाडन गांव में कोयले के भट्ठे की भीषण आग की चपेट में आने से एक मां और उसकी दो छोटी बेटियां बुरी तरह झुलस गईं। मां ने अपनी 3 साल की बेटी को बचाने के चक्कर में खुद को खतरे में डाल दिया, जिससे गोद में मौजूद 6 महीने की छोटी बेटी भी आग की लपटों से नहीं बच पाई।

यह परिवार मूल रूप से सोजत सिटी का रहने वाला है, लेकिन मजदूरी के सिलसिले में लंबे समय से जाडन गांव में एक झोपड़ी में रह रहा है। परिवार के मुखिया दिलीप मजदूरी करते हैं, जबकि उनकी पत्नी नारंगी (25 वर्ष) घर संभालती हैं। घटना उस समय हुई जब दिलीप झोपड़ी में सो रहे थे।

हादसे का पूरा ब्योरा

नारंगी ने घटना का दर्द भरा ब्यौरा देते हुए बताया, "हमारी झोपड़ी के ठीक पास ही कोयले का भट्ठा बना हुआ है। रविवार रात मेरे पति दिलीप झोपड़ी में सो रहे थे। इसी दौरान मेरी 3 साल की बेटी दिव्यांशी खेलते-खेलते भट्ठे के बहुत पास चली गई। अचानक दिव्यांशी आग की चपेट में आ गई। जैसे ही मेरी नजर उस पर पड़ी, मैं उसे बचाने के लिए दौड़ पड़ी। उस वक्त मेरी गोद में सिर्फ 6 महीने की छोटी बेटी मानसी थी। दिव्यांशी को बचाने के प्रयास में मैं खुद भट्ठे की तेज आग की लपटों में आ गई। गोद में होने की वजह से मानसी भी झुलस गई।"

मां की चीख-पुकार सुनकर पति दिलीप और आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने तीनों को तुरंत बांगड़ हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। झुलसने से तीनों के पैर, हाथ और चेहरा बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।जाडन चौकी प्रभारी रामनिवास ने बताया कि अब तीनों की हालत स्थिर और ठीक है। वे अस्पताल में भर्ती हैं और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।