जोधपुर में टीलों पर खेती, बाड़मेर में गोवा जैसा नजारा: जैसलमेर के रेगिस्तान में बाढ़, 25 साल में 3 वजहों से बदला मानसून का पैटर्न
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में इस मानसून ने एक अनोखा रंग दिखाया है। जहां एक ओर जोधपुर के रेतीले टीलों पर किसानों ने फसलों की हरियाली बिखेर दी है, वहीं बाड़मेर में हरी-भरी वादियां गोवा के समुद्री किनारों जैसी नजर आ रही हैं। सबसे चौंकाने वाली तस्वीर जैसलमेर के रेगिस्तान से आई है, जहां रेत के टीलों पर पानी की धाराएं बह रही हैं और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। यह सब कुछ सामान्य नहीं लगता। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में मानसून का पैटर्न तीन प्रमुख वजहों से पूरी तरह बदल चुका है, जिसके कारण राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में कभी सूखे की मार तो कभी बाढ़ का कहर देखने को मिल रहा है। आइए, इस खबर को विस्तार से समझते हैं।
मानसून का अभूतपूर्व रूप: रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने रेगिस्तान को सींचाइस वर्ष (2025)
राजस्थान में मानसून ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। सामान्यतः सितंबर के अंतिम सप्ताह तक बारिश का कोटा पूरा होता है, लेकिन इस बार जून से ही लगातार सक्रिय मानसून सिस्टम ने खूब पानी बरसाया। प्रदेश के 33 में से 30 जिलों में औसत से अधिक वर्षा दर्ज की गई। खासकर पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी जिले, जो हमेशा कम वर्षा के लिए कुख्यात रहे हैं, इस बार औसत से दोगुना पानी पी चुके हैं।जोधपुर का चमत्कार: जोधपुर जिले के रेतीले टीलों पर इस बार खेती का अनोखा नजारा देखने को मिला। सामान्यतः यहां सूखाग्रस्त इलाकों में केवल बाजरा या ज्वार जैसी फसलें उगाई जाती हैं, लेकिन अत्यधिक वर्षा के कारण टीलों पर गेहूं, सरसों और सब्जियों की फसलें लहलहा रही हैं। किसान बता रहे हैं कि टीलों की रेत में पानी रुक गया है, जिससे सिंचाई की जरूरत ही नहीं पड़ी। इससे न केवल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि जल स्तर में भी सुधार हुआ है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि इतनी अधिक नमी से मिट्टी का कटाव बढ़ सकता है।
बाड़मेर का गोवा जैसा सौंदर्य: बाड़मेर जिले में बारिश ने रेगिस्तानी इलाकों को हरा-भरा कर दिया है। यहां की घाटियां और मैदान गोवा के हरे-भरे समुद्री तटों की याद दिला रहे हैं। पेड़-पौधे फूट पड़े हैं, झीलें भर आई हैं और नदियां बहने लगी हैं। लूनी नदी का बसेरा, जो सालों से सूखा पड़ा था, इस बार पानी से लबालब हो गया। स्थानीय निवासी इसे 'प्रकृति का चमत्कार' बता रहे हैं, लेकिन किसानों को चिंता है कि इतनी अधिक वर्षा से फसलें सड़ सकती हैं।